दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र सिद्धि विधि

दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र की सिद्धि विधि पर नोट्स।

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The notes
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01

दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र: यह क्या है और इसके पाठ से क्या प्राप्त होता है

सब कामनाओं और मोक्ष के लिए एक स्तोत्र, विश्वसार तंत्र से

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:03–01:21

जब कोई कहे कि समय कम है और भगवती दुर्गा की नित्य उपासना के लिए एक ऐसा स्तोत्र, स्तुति या मंत्र पाठ बता दें जिससे सब कामनाएँ पूरी हों और अंत में मोक्ष भी मिले, तो वक्ता कहते हैं कि इसके लिए सर्वश्रेष्ठ, सुगम और सरल विधान है दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र — भगवती के 108 नामों की महिमा, जिसे विश्वसार तंत्र में भगवान सदाशिव ने रचा और वर्णित किया है। वे बताते हैं कि स्वयं सदाशिव ने कहा है कि इसका पाठ करने वाले को चारों पुरुषार्थ — धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष — तथा धन, धान्य, पुत्र, पौत्र, हाथी, घोड़ा सब प्राप्त होता है; जीवन में कुछ असाध्य नहीं रहता, कोई कार्य ऐसा नहीं जो सिद्ध न हो, राजा भी वश में हो जाते हैं। इसका अनुष्ठान, विशेषकर नवरात्रि में, करें तो साथ में कुमारी पूजा अवश्य करें, वे कहते हैं, और उसके बाद मंत्र पाठ से अनेक लाभ मिलते हैं।

02

दाहिनी भुजा पर धारण किया जाने वाला दुर्गा के 108 नामों का यंत्र: निर्माण की तिथि और नक्षत्र

मंगलवार की अमावस्या, चंद्र शतभिषा नक्षत्र में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:22–02:19

वक्ता कहते हैं कि इस स्तोत्र का एक और विधान आता है जिसमें 108 नामों का यंत्र बनाकर धारण किया जाता है, जिसके लिए विशेष तिथि और नक्षत्र बताए गए हैं: मंगलवार के दिन अमावस्या हो और उस दिन चंद्र शतभिषा नक्षत्र में हो, तब यंत्र का निर्माण करके दाहिनी भुजा पर धारण करें तो हर प्रकार की संपदा प्राप्त होती है — भुजा पर धारण करके पाठ किया जाए, या सिद्ध करके पहना जाए। तंत्र ग्रंथों के अनुसार यह यंत्र तीन प्रकार का बताया गया है, वे कहते हैं, पर विधान कुछ क्लिष्ट है, उसमें बहुत रचनाएँ करनी होती हैं, इसलिए वे उसे विस्तृत चर्चा के लिए आगे छोड़ देते हैं।

03

दुर्गा 108 नामों की सिद्धि कब करें: नवरात्रि या अष्टमी से चतुर्दशी

नवरात्रि में प्रतिपदा से सबसे सरल और शीघ्र फलदायी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:20–02:47

वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि में इस स्तोत्र को सिद्ध करें तो अति सरल रहेगा और बहुत जल्दी प्रभाव देगा; नवरात्रि में अनुष्ठान प्रतिपदा से आरंभ करें। किसी अन्य मास में करने जाएँ, वे कहते हैं, तो शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की अष्टमी से चतुर्दशी तिथि तक इसका अनुष्ठान करें।

वक्ता कहते हैं कि अगर साधक नवरात्र में इसे सिद्ध करता है तो उसके लिए अति सरल रहेगा और बहुत जल्दी प्रभाव देने वाला रहेगा। नवरात्रि में, वे कहते हैं, प्रतिपदा से करें। अन्य किसी मास में करने जाएँ, वे कहते हैं, तो शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष की अष्टमी से लेकर चतुर्दशी तिथि तक इसका अनुष्ठान करें।

04

दुर्गा 108 नाम अनुष्ठान की तैयारी: पूर्व पूजन, वस्त्र, दिशा और सामग्री

सब कुछ लाल, भगवती के समक्ष तिलक, हल्दी और कुमकुम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:48–03:33

भगवती दुर्गा की पूजा से पहले, वक्ता कहते हैं, गुरु, गणेश, नवग्रह इत्यादि की पूजा कर लें, फिर जगदम्बा की पूजा यथाविधि यथाशक्ति करें, और कलश स्थापना करते हों तो उसके सभी विधान पूर्ण कर लें। साधक लाल वस्त्र पहने, दिशा पूर्व या उत्तर हो, आसन भी लाल हो, और मस्तक पर रक्त चंदन की स्याही अवश्य लगाए। भगवती के समक्ष शुद्ध अष्टगंध या केसर से बना कम से कम 50 ग्राम तिलक एक अच्छे डिब्बे में रख दे, और हल्दी व कुंकुम अलग-अलग पात्र में रखे। फिर संकल्प लेकर पाठ आरंभ करे।

05

अनुष्ठान में दुर्गा 108 नामों की नित्य पाठ विधि

पहले नाम से सीधे, ग्यारह लाल फूल, रात 9 बजे के बाद, अखंड दीप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:34–04:48

वक्ता कहते हैं कि नवरात्रि में प्रत्येक दिन 108 पाठ करने हैं। स्तोत्र का आरंभ — ईश्वर उवाच, शतनाम प्रवक्ष्यामि इत्यादि — छोड़कर, वे कहते हैं, हर पाठ सीधे पहले नाम ॐ सती साध्वी भवप्रीता से आरंभ करें और 108वें नाम सावित्री प्रत्यक्षा ब्रह्मवादिनी, 15वें श्लोक, तक करें; फलश्रुति केवल 108वें पाठ के साथ पढ़ें। कम से कम ग्यारह लाल फूल रखें: एक फूल हाथ में लेकर दस पाठ करें और भगवती को समर्पित कर दें, ऐसे ही आगे, ग्यारहवें फूल पर आठ पाठ। रात 9 बजे के बाद करें तो अति उत्तम, वे कहते हैं, क्योंकि नवरात्र का समय है और रात्रि काल का विशेष महत्व है; जब तक पाठ चले अखंड ज्योति जलता रहे।

06

दुर्गा 108 नामों के नित्य पाठ के बाद ज्योतिर्लिंग नाम और भैरव के 108 नाम

द्वादश ज्योतिर्लिंग नाम कम से कम बारह बार, भैरव एक बार

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:49–05:06

नित्य 108 नामों का पाठ पूर्ण होने के बाद, वक्ता कहते हैं, साधक भगवान सदाशिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग नामों — बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम — का कम से कम बारह बार पाठ अवश्य करे, और भैरव जी के 108 नामों का एक बार पाठ करे। गुरु-गणपति का पाठ, वे बताते हैं, आरंभ में ही हो चुका है।

पाठ पूर्ण होने के बाद, वक्ता कहते हैं, भगवान सदाशिव का जो द्वादश ज्योतिर्लिंग नाम है — बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम — उसका कम से कम बारह बार पाठ अवश्य करें। फिर भैरव जी के 108 नामों का एक बार पाठ करें, वे कहते हैं। गुरु-गणपति का पाठ आरंभ में कर चुके हैं।

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दुर्गा 108 नाम अनुष्ठान में रात्रि की अनार बलि और उसके फटने का संकेत

समर्पण की प्रार्थना, फल अगली सुबह गाय को

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:07–06:13

नौ दिनों में प्रत्येक रात, वक्ता कहते हैं, साधक एक नए अनार की बलि अवश्य दे: उसे पुष्प इत्यादि के साथ एक प्लेट में सजाकर भगवती के समक्ष रखे, और पाठ पूर्ण होने पर प्रार्थना करे कि भगवती आज का पाठ-पूजा स्वीकार करें, बलि रूप में निवेदित यह अनार स्वीकार करके आशीर्वाद और रक्षण दें, साधना में सफलता दें, और जब भी किसी शुभ कामना से उनके नाम-मंत्रों का प्रयोग हो वह पूर्ण फलदायी हो। अगर पूजा के बीच या बाद में अनार स्वयं फट जाए, वे कहते हैं, तो जगदम्बा और उनकी योगिनीयों ने उसे पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया, और जान लें कि वहाँ कोई देवी शक्ति पूर्ण रूप से उपस्थित है और उनकी पूरी दृष्टि साधक पर है। वह अनार खाना नहीं है: रात भर रहने दें और सुबह किसी गाय को खिला दें।

08

दुर्गा 108 नाम अनुष्ठान में कुल 1,100 पाठ और नवमी हवन से पहले अष्टमी तक की सीमा

108 को 100 मानें: आठ दिन के 800, 300 और दिन में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:14–06:46

वक्ता कहते हैं कि अगर नवमी को हवन करते हैं तो अष्टमी तिथि तक ही पाठ कर लेना चाहिए, और नवमी को सुबह-सुबह पहले पाठ करके हवन कर लें। पूरा पाठ कम से कम 1,100 करना है: प्रतिदिन 108 पाठ में 100 पाठ माने जाते हैं, तो आठ दिन में 800 ही होंगे, इसलिए बचे 300 पाठ प्रतिपदा से अष्टमी के बीच किसी भी तिथि में, दिन में या दोपहर में कभी भी करके पूरे कर लें ताकि 1,100 पाठ पूर्ण हो जाएँ।

09

पुरुष साधकों के लिए दुर्गा 108 नामों का हवन: घी में मधु और गुग्गुल, हर नाम से ग्यारह आहुति

पौष्टिक कर्म, इसलिए घी; हवन के लिए नामावली

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:47–08:11

वक्ता कहते हैं कि इस हवन की सामग्री का विशेष ध्यान रखें क्योंकि यह पौष्टिक कर्म है — स्तोत्र को पुष्ट रूप में सिद्ध किया जा रहा है — इसलिए पुरुष घी से आहुति करें, घी में मधु और थोड़ा गुग्गुल मिलाकर। 108 नामों को अलग से नामावली के रूप में लिख लें, केवल हवन के लिए (पाठ के लिए तो पूरा स्तोत्र है): पहली आहुति सती के नाम से, दूसरी साध्वी, तीसरी भवप्रीता, ऐसे 108 तक। 1,100 पाठ किए हैं इसलिए हर नाम से ग्यारह-ग्यारह आहुति, कुल लगभग 1,100। आरंभ में, वे कहते हैं, गुरु, गणपति, भैरव जी सबकी आहुति पहले दे दें; ये आहुतियाँ बाद में, फिर पूर्णाहुति।

10

मिश्रित हवन सामग्री और अर्गला स्तोत्र के प्रथम मंत्र से 108 आहुति

धूप की लकड़ी, काला तिल, जौ, पंचमेवा और अनार के बीज

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:12–09:12

पूर्णाहुति से पहले, वक्ता कहते हैं, एक हवन सामग्री तैयार करें: सुगंधित धूप की लकड़ी कम से कम आधा किलो, 250 ग्राम काला तिल, 125 ग्राम जौ, थोड़ा चावल, पंचमेवा, मधु और घी, सब मिलाएँ, और कम से कम दो बढ़िया लाल अनारों के बीज निकालकर उसी सामग्री में मिला दें। जब नामों का हवन पूर्ण हो जाए, वे कहते हैं, तो अर्गला स्तोत्र के प्रथम मंत्र — जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, इस पूरे मंत्र — से इस सामग्री की 108 आहुति दें।

11

साधिकाओं के लिए दुर्गा 108 नामों का हवन: घी से कभी नहीं, केवल मिश्रित सामग्री से

अग्नि जलाए रखने भर को घी या कपूर, बिना मंत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:13–09:39

वक्ता कहते हैं कि साधिकाएँ यह हवन धूप की लकड़ी, काला तिल, जौ, चावल, पंचमेवा, मधु, घी और अनार के बीजों वाली मिश्रित सामग्री से ही करें, क्योंकि महिलाओं को कभी भी घी से आहुति नहीं करनी चाहिए। इसलिए यह साधना करने वाली साधिका पूरी 1,100 आहुति — हर नाम से ग्यारह-ग्यारह — इसी सामग्री से दे। बीच में अग्नि प्रज्वलित रखने के लिए बिना किसी मंत्र के चम्मच से हवन कुंड में घी डाल सकती है, या कपूर डाल सकती है।

12

दुर्गा हवन के बाद 108 नामों में से हर नाम से तर्पण और मार्जन

हर नाम से एक बार, क्योंकि हवन हर नाम से ग्यारह था

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:40–10:08

हवन के बाद, वक्ता कहते हैं, तर्पण करना है, और यहाँ यह थोड़ा लंबा होगा: क्योंकि हवन हर नाम से ग्यारह-ग्यारह बार हुआ है, इसलिए हर नाम से एक-एक बार तर्पण करना है — यानी 108 नामों से तर्पण। फिर मार्जन, वह भी 108 नामों से, हर नाम से एक-एक बार। तर्पण की विधि, वे कहते हैं, उनके चैनल पर अलग वीडियो में बताई गई है।

13

पूर्णाहुति से पहले नवदुर्गा को नौ जायफल की आहुति

घी में डुबोया एक जायफल हर दुर्गा के नाम से, स्त्री-पुरुष दोनों

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:09–10:42

पूर्णाहुति से पहले, जब हवन पूर्ण हो जाए, वक्ता कहते हैं, जायफल से आहुति करनी है: नौ जायफल लें, घी में डुबोएँ, और नवदुर्गा में से प्रत्येक दुर्गा के नाम से एक-एक जायफल की आहुति दें — शैलपुत्री दुर्गायै स्वाहा, ब्रह्मचारिणी दुर्गायै स्वाहा, ऐसे नौ। जायफल की आहुति, वे कहते हैं, स्त्री-पुरुष दोनों को देनी है।

14

दुर्गा 108 नाम हवन को पूर्ण करने वाली नींबू बलि और खड़े होकर पूर्णाहुति

दो नींबू खड़े काटकर; दही-गुड़ भरी नारियल गरी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:43–11:21

जायफल की आहुतियों के बाद, वक्ता कहते हैं, दो नींबू की बलि करनी है — एक दुर्गा जी के नाम से, एक भैरव जी के नाम से: नींबू को खड़ा काटकर हवन कुंड में डाल दें। दोनों नींबू डालने के बाद साधक खड़े होकर पूर्णाहुति करे। उसकी विधि: नारियल की गरी काटकर उसमें दही और गुड़ भरें, लाल कपड़े में लपेटें और पान के पत्ते पर रखें; बना सकें तो घी की पाँच पूरियाँ बनाकर रखें, उसके ऊपर खीर या गुड़ रखें, फिर पूर्णाहुति का मंत्र पढ़कर हवन कुंड के बीच में रखकर पूर्णाहुति कर लें। इससे, वे कहते हैं, विधान पूर्ण हुआ।

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दुर्गा 108 नामों की सिद्धि पूर्ण करने वाला नौ कन्या पूजन

पूजन के दौरान कंठस्थ स्तोत्र चलता रहे

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:22–11:39

हवन, तर्पण और मार्जन के बाद, वक्ता कहते हैं, नौ कन्याओं का पूजन करना है। कन्या पूजन के समय साधक अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का पाठ करता रहे — तब तक, वे कहते हैं, वह कंठस्थ हो ही गया होगा। इस प्रकार स्तोत्र पूरी तरह सिद्ध हो जाता है।

तर्पण-मार्जन के बाद, वक्ता कहते हैं, नौ कन्या का पूजन करना है। नौ कन्या पूजन करने के समय, वे कहते हैं, चूँकि यह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र तब तक साधक को कंठस्थ हो ही गया होगा, उसका पाठ करते रहना है। इस प्रकार, वे कहते हैं, स्तोत्र पूरी तरह सिद्ध हो जाता है।

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जीवन बदलने के लिए वर्ष भर दुर्गा 108 नाम अनुष्ठान की पुनरावृत्ति

कम से कम ग्यारह बार; चार नवरात्र और अष्टमी से चतुर्दशी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:40–12:06

वक्ता कहते हैं कि इस अनुष्ठान को बार-बार करना चाहिए — संभव हो तो कम से कम ग्यारह बार अवश्य। साल में चार नवरात्र आते हैं, दो गुप्त नवरात्रि और दो प्रकट, तो चार अनुष्ठान ऐसे ही हो जाएँगे; और बाकी महीनों में भी अष्टमी से चतुर्दशी तक 1,100 पाठ, हवन इत्यादि करते रहें तो साल भर के भीतर, वे कहते हैं, यह साधक का जीवन बदलकर रख देगा — यह अत्यंत दिव्यतम चीज़ है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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