साधना में दिव्य शक्ति की रक्षा के संकेत
नए साधकों से जुड़ी दिव्य शक्ति के संकेतों पर नोट्स।
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सामान्य गृहस्थ साधक के लिए "साथ चलने वाली दिव्य शक्ति" का अर्थ
कोई लोकपाल या गण, स्वयं सदाशिव नहीं
वक्ता कहते हैं कि तीन-छह महीने साधना कर चुका नया साधक यह जानने को बहुत उत्सुक हो जाता है कि उसके साथ कोई दिव्य शक्ति है या नहीं, प्रायः इसलिए कि उसने किसी अन्य साधक के किसी देवता से जुड़े अनुभव सुने होते हैं। वे पहले यह समझने को कहते हैं कि आज जिस स्तर पर एक सामान्य गृहस्थ जी रहा है, उस स्तर पर दिव्य शक्ति का अर्थ केवल भगवती, महादेव या किसी महाशक्ति का कोई लोकपाल, गण या शक्ति है — न कि स्वयं सदाशिव आपके साथ चलेंगे। यदि साक्षात सदाशिव किसी के साथ चलने लगें, तो उनके अनुसार उस व्यक्ति की भक्ति इतनी ऊँची होगी कि उसे ये प्रश्न YouTube पर खोजने की जरूरत ही नहीं रहेगी। शुरुआत हमेशा छोटी होती है, और इसी छोटी शुरुआत से मनोबल इतना बढ़ता है कि एक दिन महादेव भी पूर्ण कृपा करते हैं।
वक्ता कहते हैं कि यह प्रश्न सबसे अधिक उस नए साधकसाधना करने वाला; सामान्य पूजक से भिन्न, नियमबद्ध अभ्यासी। में उठता है जिसने तीन या छह महीने साधना कर ली है: क्या मेरे साथ कोई दिव्य शक्ति है या नहीं, और इसे कैसे जानें? वे बताते हैं कि यह प्रश्न आता कहाँ से है। जब कोई साधना आरंभ करता है, तो उसके मन में किसी एक देवता के प्रति बहुत निष्ठा और समर्पण होता है, और उसके पीछे प्रायः कोई सुनी हुई घटना होती है — कि फलाना व्यक्ति भगवती के स्वरूप की सेवा करता था और उसके प्रभाव से उसने शत्रुओं पर विजय पाई। दूसरे साधक का जीवन ही प्रेरणा बन जाता है। फिर यह सुनकर कि "फलाने को ऐसे-ऐसे अनुभव होते हैं और वह कहता है कि उसके साथ कोई शक्ति चलती है", नया साधक पूछता है कि क्या उसके साथ भी ऐसा है, और है तो कौन सी शक्ति। कोई संकेत बताने से पहले वे श्रोता से एक बात पूरी तरह समझने को कहते हैं। एक सामान्य व्यक्ति, एक गृहस्थ, और जिस स्तर पर हम सब अभी जी रहे हैं, उस स्तर पर दिव्य शक्ति का अर्थ केवल भगवती, महादेव या अन्य महाशक्तियों के किसी लोकपाल, गण या शक्ति को लेकर कहा गया है। इसका अर्थ यह नहीं कि साक्षात सदाशिव आपके साथ चलेंगे। यदि साक्षात सदाशिव या महादेव किसी के साथ चलने लगें, तो उनके अनुसार उस स्तर की भक्ति इतनी अधिक होगी कि उस व्यक्ति को ये विषय YouTube पर सोचने-खोजने की जरूरत ही नहीं होगी; वह स्तर ही अलग होता है। लेकिन सामान्य शुरुआत, वे कहते हैं, छोटी ही होती है। यहीं से आरंभ करने पर ही मनोबल इतना बढ़ता है कि एक समय ऐसा आता है जब स्वयं महादेव पूर्ण सक्षमता के साथ कृपा करते हैं और साधक को भी सक्षम बनाते हैं। वे कहते हैं कि सबसे पहले इस विषय को समझ लिया जाए।
दिव्य कृपा का संकेत: तांत्रिक अखाड़ा क्षेत्र से अप्रभावित निकल जाना
जहाँ दूसरे गिरते हैं, वहाँ बाल भी बाँका नहीं
वक्ता कहते हैं कि किसी देवता की कृपा आप पर होने का पहला संकेत यह है: राम नवमी, शिवरात्रि, सावन के महीने या अम्बुबाची के समय किसी तांत्रिक अखाड़ा क्षेत्र में चले जाइए, जहाँ शक्ति प्रदर्शन में ऊर्जाएँ एक-दूसरे पर प्रक्षेपित की जा रही होती हैं और साधक हों या सामान्य लोग, कोई "खेलने" लगता है, कोई रोने-चिल्लाने लगता है, किसी को परेशानी होने लगती है। यदि कोई दिव्य शक्ति आपके साथ है, तो आप उस क्षेत्र से स्थिर होकर पार हो जाएँगे, कोई बाल तक न उखाड़ पाएगा, भले आपको कभी कोई प्रत्यक्ष दर्शन न हुआ हो। वे अपना अनुभव बताते हैं: दूसरा मायोंग कहे जाने लायक एक क्षेत्र में उनके चार साथियों पर तंत्र हुआ और दो-तीन घंटे में उन्हें डिसेंट्री और पानी चढ़ाने तक की नौबत आ गई, जबकि बहुत कम आयु के और केवल सामान्य जगदम्बा सेवा करने वाले उन्हें एक छींक तक न आई। वे कहते हैं कि शक्ति अपने बच्चे की पूर्ण रूप से रक्षा करती है।
वक्ता कहते हैं कि यदि आप किसी देवी-देवता की साधना-उपासना कर रहे हैं और उनकी कृपा आप पर है, तो इसे तंत्र के अखाड़ों के समय परख सकते हैं: राम नवमी का समय जब अखाड़ा क्षेत्र लगता है, शिवरात्रि, सावन का महीना या अम्बुबाची जैसा पर्व। उस समय किसी भी अखाड़ा क्षेत्र में चले जाइए, या अपने जीवन की ऐसी किसी घटना को याद कीजिए। वहाँ आप देखेंगे कि साधक हो या सामान्य व्यक्ति, किसी पर कुछ "आ जा रहा" है — कोई खेलने लगता है, किसी को परेशानी होने लगती है, कोई रोने लगता है, कोई चिल्लाने लगता है। वे अखाड़ा क्षेत्र को शक्ति प्रदर्शन का क्षेत्र कहते हैं, जहाँ ऊर्जाओं का बहुत उथल-पुथल मचा होता है। वे बताते हैं कि गाँव में बड़े-बुजुर्ग — घर की बड़ी महिलाएँ, माँ-पिताजी — अखाड़े के समय कहीं जाने से मना करते हैं और कहते हैं "आज के दिन वहाँ नहीं जाना"। बड़े लोग स्वयं जाते हैं, पूजा चढ़ाकर चले आते हैं, रुकते नहीं; जिन्हें बहुत जानकारी हो वही रुककर देखते-सुनते हैं, या जिन्हें किसी को कुछ दिखाना-सुनाना हो, वह विषय अलग है। उनका कहना यही है: जिस जगह नकारात्मक, सकारात्मक या किसी भी प्रकार की शक्तियाँ एक-दूसरे पर प्रक्षेपित की जा रही हों, ऊर्जा और शक्ति का प्रदर्शन हो रहा हो, वहाँ भी यदि दिव्य शक्तियों की कृपा आप पर है, तो आप स्थिर होकर पार हो जाएँगे, आपका कोई बाल न उखाड़ पाएगा, कुछ न होगा। यह तब भी सच है जब आपको प्रत्यक्ष रूप से कोई दर्शन या कोई और अनुभव न हुआ हो। वे अपना निज अनुभव बताते हैं। वे बहुत कम आयु में, अनजाने में, एक ऐसे क्षेत्र में गए जिसे वे जादू और तंत्र-मंत्र के लिए दूसरा मायोंग मानने कहते हैं; उन्हें उस क्षेत्र की जानकारी नहीं थी। उनके साथ चार व्यक्ति थे। उन चारों पर तंत्र हुआ; उनकी हालत इतनी खराब हुई — पेट झड़ना, डिसेंट्री — कि वे चल नहीं पा रहे थे और दो-तीन घंटे में पानी चढ़वाना पड़ा। वे इतनी कम आयु के होकर भी वहाँ से बिल्कुल सही-सलामत लौटे, एक छींक तक न आई। उस समय वे कोई विशेष साधना नहीं करते थे, केवल जगदम्बा"जगत की माता" — देवी का एक नाम। की सामान्य सेवा करते थे। वे कहते हैं कि यह आपके साथ भी हो सकता है। बाद में इस विषय को देखने पर उन्होंने पाया कि जिस पर शक्तियों की पूर्ण रूप से प्रथम कृपा होती है, वह किसी भी ऐसे क्षेत्र में चला जाए, उस पर तंत्र का प्रभाव नहीं पड़ता: शक्ति अपने बच्चे की पूर्ण रूप से रक्षा करती है। यह, वे कहते हैं, पहला संकेत है।
दिव्य कृपा का संकेत: उतारा लाँघने से पहले किसी पशु-पक्षी की आवाज से चेतावनी
चील, कुत्ता या बिल्ली ध्यान खींच लेते हैं
वक्ता कहते हैं कि दूसरा संकेत तब मिलता है जब आप ऐसी जगह से गुजरते हैं जहाँ नकारात्मक ऊर्जा या किसी का उतारा रखा गया है — अमावस्या, पूर्णिमा, काली अमावस्या या चौदस की रात चौक-चौराहे पर, या कहीं भी जहाँ सिर से उतारकर उतारा रखा गया हो, दिया जलाया गया हो, या पुतला तंत्र का प्रयोग हुआ हो; ऐसा क्षेत्र खराब होता है। यदि शक्ति की कृपा आप पर है और आप अनजाने में उस पर पैर रखने या वाहन से लाँघने वाले हैं, तो ठीक उसी समय किसी पशु-पक्षी की बहुत तेज आवाज आती है — कोई चील चिल्लाती है, कुत्ता एकाएक जोर से रोता है — या बिल्ली रास्ता काट देती है। वे कहते हैं कि यह केवल उस शक्ति का संकेत मात्र है, फ्रैक्शन ऑफ सेकंड का, जो आपका ध्यान सामने की ओर खींचता है ताकि आप उसे लाँघ न जाएँ, और इस तरह तंत्र से बचाव हो जाता है।
वक्ता दूसरा संकेत बताते हैं। यह तब मिलता है जब आप किसी ऐसी जगह से गुजरते हैं जहाँ नकारात्मक ऊर्जा या किसी शक्ति का उतारा रखा गया है। वे विशेष ध्यान देने को कहते हैं: अमावस्या के समय, पूर्णिमा के समय, काली अमावस्या या चौदस की रात जैसे किसी विशेष दिन चौक-चौराहे पर, या कोई भी जगह जहाँ किसी के सिर से उतारकर उतारा रखा गया हो, दिया जलाया गया हो, या किसी प्रकार का पुतला तंत्र किया गया हो। ऐसा क्षेत्र, वे कहते हैं, खराब होता है। वहाँ से गुजरते समय यदि शक्ति की कृपा आप पर है, तो दो काम होते हैं। वे कहते हैं कि यह निज अनुभव की बात है। पहला, जिस क्षण वह चीज आपके सामने आने वाली हो — जैसे आप वाहन से जा रहे हैं और गलती से उसे लाँघ सकते हैं या आपका पैर पड़ सकता है — वहाँ किसी पशु-पक्षी की काफी तेज आवाज आती है। लगेगा जैसे कोई चील बहुत जोर से चिल्लाई या कोई रोया। वह आवाज, वे कहते हैं, केवल उस शक्ति का संकेत मात्र है जिसकी कृपा आप पर है। या कुत्ता एकाएक बहुत जोर से रोएगा, ताकि आपका ध्यान उस ओर खिंचे: "देखो, सामने कोई चीज है", और आप उसे लाँघ न जाएँ। और यदि वह नहीं, तो वे कहते हैं कि वहाँ बिल्ली रास्ता काट देगी, या आसपास कोई ऐसी छोटी घटना फ्रैक्शन ऑफ सेकंड के लिए होगी, बस इतनी कि आपको लगे "अरे, मुझे यहाँ ध्यान रखना है"। यही दूसरा संकेत है, और इससे तंत्र से बचाव हो जाता है।
दिव्य कृपा का संकेत: स्वप्न में आने वाली घटना का पूर्वाभास
सबसे अच्छा संकेत, बखान से बिगड़ता है
वक्ता तीसरे संकेत को सबसे दिव्य और सबसे अच्छा कहते हैं: स्वप्न के माध्यम से किसी आने वाली घटना का पूर्वाभास हो जाना। वे कहते हैं कि इसी को कोई साधक संभाल नहीं पाता — जब यह दो-चार बार हो जाता है, तो हम प्रसन्न होकर सबसे कह देते हैं "मुझे तो यह सब पता था, देखो ऐसा हो गया", और वहीं हम अपना सारा खराब कर लेते हैं। वे जोड़ते हैं कि स्वप्न में देवी के दर्शन का क्या अर्थ है, स्वप्न में मंत्र मिले तो क्या करें, और स्वप्न में किसी क्षेत्र में ले जाया जाए तो क्या करें — इन पर उनके चैनल पर अलग-अलग वीडियो हैं; हर व्यक्ति के लिए घटना अलग हो सकती है, पर मूल वही होता है।
वक्ता कहते हैं कि तीसरा संकेत सबसे दिव्य और सबसे अच्छा होता है, और यही वह है जिसे कोई साधक संभाल नहीं पाता। यह है स्वप्न के माध्यम से किसी आने वाली घटना का पूर्वाभास हो जाना — पहले से संकेत मिल जाना। वे कहते हैं कि समस्या यह है कि हम इसका क्या करते हैं। जब यह दो-चार बार हो जाता है, तो हम प्रसन्न होकर सबसे बोल जाते हैं, "अरे मुझे तो यह सब पता था, देखो ऐसा हो गया" — और वहीं हम अपना सारा खराब कर लेते हैं। वे कहते हैं कि इसे उन्होंने दो-तीन अलग वीडियो में समझाया है। उन वीडियो में, वे बताते हैं, यह है कि स्वप्न में देवी दर्शन दें तो क्या होता है, स्वप्न में मंत्र मिले तो क्या करना चाहिए, और स्वप्न में किसी क्षेत्र में ले जाया जा रहा हो तो क्या करना चाहिए। वे उन्हें सुनकर-समझकर आगे चलने को कहते हैं, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के लिए हर घटना अलग हो सकती है, पर मूल में वही होता है। इसके साथ, वे कहते हैं, तीन प्रमुख संकेत पूरे हुए।
दिव्य कृपा का संकेत: आपके विरुद्ध हो चुके व्यक्ति के पास ऊर्जा का गिर जाना
शक्ति सामने आकर नहीं, मस्तिष्क से चेताती है
वक्ता कहते हैं कि तीन प्रमुख संकेतों के सिवा एक और अनुभव होता है, जब कोई आपका अहित करना चाहता हो। जो व्यक्ति कल तक आपके लिए अच्छा था, वह अब आपके लिए बुरा सोच रहा हो, तो शक्ति ऐसी कृपा करती है कि उससे मिलते ही आपके शरीर की ऊर्जा डाउन हो जाती है और आप उसे लेकर नकारात्मक हो जाते हैं। यदि किसी एक व्यक्ति से मिलने पर बार-बार ऐसा हो, तो वे कहते हैं, समझ लीजिए कि वह आपके विरुद्ध षड्यंत्र कर रहा है और आपके मान-सम्मान, आर्थिक या सामाजिक हानि का कारण बनने वाला है; शक्ति आपके मस्तिष्क के माध्यम से बार-बार यह संकेत दे रही है ताकि आप सावधान और सजग हो जाएँ। वे समझाते हैं कि आप इतने बड़े साधक नहीं हैं कि किसी शक्ति को प्रत्यक्ष कर लिया हो और वह सामने आकर बताए; लेकिन जिस शक्ति की कृपा आप पर है, वह अपनी सीमा में रहकर इन्हीं अप्रत्यक्ष माध्यमों से हर जगह आपकी रक्षा करती और रोकती है।
वक्ता कहते हैं कि तीन प्रमुख संकेतों के सिवाय एक और अनुभव होता है, और वह तब आता है जब कोई आपका अहित करना चाहता हो। जो व्यक्ति आज आपके लिए अच्छा है, वह कल आपके लिए बुरा सोचने लग सकता है। ऐसा होने पर शक्ति ऐसी कृपा करती है: जब भी आप उससे मिलेंगे, मिलते ही आपके शरीर की ऊर्जा डाउन हो जाएगी और आप उसे लेकर नकारात्मक हो जाएँगे। यदि किसी एक व्यक्ति से मिलने पर बार-बार ऐसा हो रहा है, तो वे कहते हैं, समझ लीजिए कि वह कहीं न कहीं आपके विरुद्ध षड्यंत्र कर रहा है और आपके मान-सम्मान, आर्थिक या सामाजिक हानि का कारण बनने वाला है। शक्ति आपके मस्तिष्क के माध्यम से वह संकेत दे रही है, बार-बार वह संकेत या विचार आपके मस्तिष्क में डाल रही है, ताकि आप सावधान और सजग हो जाएँ। वे बताते हैं कि यह इस तरह क्यों आता है। आप कोई इतने बड़े साधक नहीं हैं कि किसी शक्ति को प्रत्यक्ष कर लिया हो और वह सामने आकर बताए, "यहाँ देखो, ऐसा हो रहा है"। लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से, अपनी सीमा में रहते हुए, जिस शक्ति की कृपा आप पर है, वह इन्हीं माध्यमों से हर जगह आपकी रक्षा करती है, हर प्रकार से बचाती और रोकती है। वे आशा करते हैं कि श्रोता अपने जीवन में इन चीजों को देखकर समझेंगे कि शक्ति की कृपा उन पर अभी तक हुई है या नहीं, और कहते हैं कि इसके अलावा भी अन्य संकेत हैं जिन्हें वे आगामी वीडियो में साझा करेंगे।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।