थावे की भवानी, कुलदेवी, ने घर पर छाई तामसिक शक्ति को कैसे वश में किया — एक सत्य घटना

एक परिवार के घर पर तामसिक शक्ति के दावे और उनकी कुलदेवी थावे वाली भवानी द्वारा उसे नियंत्रित करने की सत्य घटना — रहसू भगत की कथा और अपनी कुल शक्ति की सेवा पर वक्ता की सीख के साथ।

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01

अपने कुल की शक्ति की कृपा बाहरी देवताओं से जल्दी मिलती है

कुल शक्ति को जानकर सेवा करें तो क्षण भर में कृपा दृष्टि; प्रारब्ध फिर भी आड़े आता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:06–00:50

वक्ता कहते हैं कि यह सर्वविदित है कि बाहर की जितनी भी शक्तियाँ हैं, उनकी कृपा पाने में भले देर लगे, लेकिन यदि हमें अपने कुल की शक्ति के विषय में सही जानकारी हो और हम उनकी सेवा करें तो उनकी कृपा दृष्टि क्षण भर में प्राप्त हो सकती है। वे जोड़ते हैं कि वहाँ भी हमारे कर्मों से निर्मित प्रारब्ध आड़े आता ही है और उसका कहीं न कहीं प्रभाव पड़ता है। जो सत्य घटना वे सुनाते हैं, वे कहते हैं, उसका उद्देश्य अपने कुल की शक्तियों और मुख्य देवता के प्रति विश्वास को और दृढ़ करना है।

02

घटना: खरीदी ज़मीन पर बने घर में नवरात्र षष्ठी को सवारी आना शुरू

सात्विक पर साधक नहीं परिवार; पूजन स्थान पर झूमना, याद न रहना, क्रोध भरी परायी बोली, "यह मेरी जगह है"

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:36–07:00

वक्ता एक सत्य घटना सुनाते हैं, लगभग डेढ़ वर्ष पुरानी, जो उनके दिल्ली के एक साधक मित्र ने साझा की: बिहार के सारण जिले का एक व्यक्ति, जो राजस्थान-दिल्ली मार्ग के औद्योगिक क्षेत्र में नौकरी करता था, एक पुराने घर वाली ज़मीन खरीदकर घर बनवाता है और माता-पिता व नवविवाहिता पत्नी के साथ रहने लगता है। परिवार सात्विक था पर आध्यात्मिक बिल्कुल नहीं — सुबह-शाम धूप-दीप, अधिक से अधिक हनुमान चालीसा। सात-आठ महीने बाद शारदीय नवरात्र की षष्ठी रात्रि को पत्नी पूजन स्थान पर जाकर आधा घंटा ऐसे झूमती है जैसे सवारी आती है, फिर रात भर बेहोश पड़ी रहती है और उसे भारी शरीर के सिवा कुछ याद नहीं रहता। अगली शाम वह गेट पर खड़ी होकर हरियाणा की ओर की क्रोध भरी जाट बोली में चिल्लाती है कि मैं यहाँ से नहीं जाऊँगी, "यह मेरी जगह है"।

04

घटना: भस्म का कवच केवल अस्थायी राहत देता है; शरद पूर्णिमा को शक्ति उसे तोड़ देती है

सवारी वाली स्त्री का असामान्य बल, और उसकी बोली जानने वाला उसे चुप बैठा देता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:21–09:11

वक्ता कहते हैं कि नवमी को मंदिर के महंत ने जो क्रिया उन्हें आती थी, की; स्त्री का शरीर हल्का हो गया पर शक्ति ने कुछ न कहा, कुछ पता न चला। महंत ने अपने नवरात्र के भगवती हवन की भस्म उसके हाथ पर बाँध दी और यह कहकर घर भेज दिया कि दोबारा कुछ हो तो घर आकर देखेंगे। दो-तीन दिन ठीक रहा; फिर शरद पूर्णिमा की रात उसने पूरा कवच तोड़कर फेंक दिया, चिल्लाने लगी, और पतली-दुबली होते हुए भी पास आने वाले को चार-पाँच फीट दूर फेंकती थी। महंत उसकी बोली के क्षेत्र के एक जानकार मित्र के साथ आए तो वह और भड़क गई; उस मित्र ने कुछ कहा, वह चुपचाप बैठ गई, और तभी पूछा जा सका कि तुम कौन हो, क्या चाहती हो।

05

घटना: स्थान की शक्ति का ज़मीन पर दावा और बलि की माँग

छोटे आम के पेड़ के नीचे पूजित, जिसे नए मालिकों ने कटवाया; बलि माँगना तामसिक शक्ति का लक्षण; बेचने वाले मुकर गए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:12–10:55

वक्ता बताते हैं कि शक्ति ने स्त्री के माध्यम से कहा कि वह उस जगह पर बहुत लंबे समय से पूजित रही है; उसका स्थान एक छोटे आम के पेड़ के नीचे था जो कभी बड़ा नहीं हुआ, पुराना परिवार वहीं पूजा करता था, और नए लोगों ने वह पेड़ कटवा दिया। "मुझे मेरी पूजा चाहिए। मैं बलि लेती हूँ, मुझे बलि चाहिए।" वह किसी भी स्थिति में जगह नहीं छोड़ेगी, और पूजा न मिली तो परिवार पर घात होगा। मानने को तैयार न होना और ऊपर से बलि माँगना, वे कहते हैं, दिखाता है कि यह कोई तामसिक शक्ति थी। पुराने मालिकों से संपर्क करने पर वे स्वामित्व, अधिकार और जानकारी सबसे साफ मुकर गए, और कोई हल दिखाई नहीं दे रहा था।

06

किसी शक्ति का स्थान भंग करने वाला अनजाने में भी दोषी होता है

जिस शक्ति का स्थान आपने तोड़ा, उस पर बल प्रयोग पहला उत्तर क्यों नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:56–11:20

जब कोई मार्ग न दिखा, वक्ता कहते हैं, तो जानकार मित्र अपने गुरु के पास गए। वे गुरु का पहला सिद्धांत बताते हैं: यहाँ बल प्रयोग उचित नहीं, क्योंकि आप उसके स्थान पर जाकर बसे हो और आपने उसका स्थान भंग किया है। वह चाहे कितनी भी नकारात्मक चीज़ हो, परेशानी यह है कि आपने उसे सही तरीके से हटाया नहीं। ये सारी चीज़ें अनजाने में हुईं — फिर भी दोषी आप हो।

07

स्थान की शक्ति के लिए बलपूर्वक हटाना बनाम शांति विधान

शांत की गई शक्ति को बार-बार शांत करना पड़ता है; सात्विक परिवार तामसिक पूजा नहीं कर सकता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:21–11:46

वक्ता बताते हैं कि जिस शक्ति का स्थान भंग हुआ हो उसके लिए गुरु ने दो मार्ग बताए: या तो तंत्रों के विधि-विधान से उसे बलपूर्वक हटाया जाए, या शांति विधान करके शांत किया जाए। लेकिन शांत की गई शक्ति हमेशा के लिए शांत नहीं होती — उसे बार-बार शांत करना पड़ता है, यानी शांत रखने के लिए भी पूजा ही माध्यम बनती है। और यह परिवार पूर्ण रूप से सात्विक था, इसलिए वहाँ किसी प्रकार की तामसिक पूजा भी नहीं हो सकती थी; दोनों मार्ग बंद थे।

08

थावे धाम के रहसू भगत कौन हैं?

कामाख्या का उनमें प्रवेश, कंगन, राजा मनन सिंह की परीक्षा, राज्य का विनाश और वहाँ स्थापित हाथ का स्वरूप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:47–13:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि बिहार के सारण जिले के पास थावे एक प्रमुख धाम है, और रहसू भगत वहाँ के सबसे प्रमुख, एक तरह से लोक देवता हैं। कथा है कि कामरूप की भगवती कामाख्या साक्षात उनके शरीर में प्रवेश करके सिर से निकल गई थीं। उन्होंने रहसू भगत को एक कंगन दिया था जिसके माध्यम से अकाल पड़ने पर वे लोगों की सेवा करते थे; राजा मनन सिंह ने ईर्ष्यावश इस पर विश्वास न किया, उन्हें बंदी बनाया और भगवती को बुलाकर दिखाने को कहा। भगवती ने चेताया कि उनके आने से राजा और राज्य का विनाश होगा; राजा न माना, भगवती भक्त की परीक्षा लेने आईं, महल और राज्य नष्ट हुआ, और रहसू भगत का सिर फाड़कर कंगन पहने हाथ के रूप में जो स्वरूप निकला, वही थावे में स्थापित है।

09

शक्ति को जाति से नहीं तोला जाता: रहसू भगत और वाल्मीकि समाज

ज़मीन की तामसिक शक्ति और थावे के लोक देवता दोनों वाल्मीकि समाज के

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:37–14:16

वक्ता श्रोता से दो बातें ध्यान में रखने को कहते हैं: उस घर में पहले पूजित शक्ति वाल्मीकि समाज की एक तामसिक शक्ति थी, और रहसू भगत भी वाल्मीकि समाज से संबंध रखते हैं, ऐसा कहा जाता है, और लोक देवता के रूप में पूजित हैं। वे कहते हैं कि सनातन संस्कृति में हर जगह इसका ध्यान रखा गया है — जात-पात के आधार पर किसी शक्ति को कभी आदर-सम्मान से वंचित या निकृष्ट नहीं माना गया। सीधी सी बात है: जिस पर साक्षात जगदंबा की परम कृपा हो, उसे जाति के अनुसार भला कोई कैसे तोल सकता है?

10

स्थान की शक्ति को बिना दोष केवल परिवार की अपनी कुल शक्ति ही नियंत्रित कर सकती है

गुरु का पहला प्रश्न — कुलदेवी कौन — और उनका निर्णय; अन्य प्रयोग में दोष, ज़रा सी चूक घातक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:17–14:48

वक्ता कहते हैं कि दोनों मार्ग बंद होने पर गुरु ने पीड़ित परिवार से पूछा कि आप किसकी पूजा करते हैं, आपकी कुलदेवी-देवता कौन हैं; उन्होंने कहा कि कुछ विशेष नहीं करते, तो गुरु ने फिर पूछा और पिताजी ने बिहार के सारण के पास थावे धाम का नाम लिया। जब उन्होंने कहा कि गाँव में वे कुलदेवी के रूप में पूजित हैं पर यहाँ हमने कुछ नहीं किया, तब गुरु ने निर्णय दिया: इस शक्ति का नियंत्रण केवल वही, कुल की शक्ति ही कर सकती हैं। यदि हम लोग कोई प्रयोग करेंगे तो कहीं न कहीं दोष लगेगा; चीज़ हो तो सकती है, पर ज़रा सी चूक हुई तो कुछ भी गड़बड़ हो सकता है। वक्ता जोड़ते हैं कि तंत्र में कुछ भी असंभव नहीं — भगवती ऐसी हैं कि किसको न बाँध दिया जाए — लेकिन फिर भी।

11

घर में कुलदेवी की स्थापना और ज़मीन की शक्ति को उनके नीचे स्थान

थावे धाम में आह्वान, स्वरूप घर लाना, दो छोटे स्थान, पूरा तंत्रोक्त विधान जिसके विवरण नहीं बताए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:49–15:42

वक्ता कहते हैं कि पूरा परिवार गुरु के साथ थावे धाम गया और कुलदेवी के आह्वान की पद्धति के अनुसार भगवती का आह्वान, यानी निमंत्रण हुआ: उनका एक स्वरूप वहीं स्थापित करके, थावे धाम में ही पूजित करके, निमंत्रण देकर अपने घर लाया गया। घर के अंदर दो छोटे मंदिर, दो स्थान बने — एक कुलदेवी के लिए, और दूसरा, थावे वाली महारानी के नीचे, उस शक्ति के लिए जो ज़मीन पर पूजित थी। यह सब गुरु ने पूरे तंत्रोक्त विधि-विधान से किया, जिसकी बहुत सी बातें, वे कहते हैं, वे नहीं बता रहे।

12

कुलदेवी के नीचे स्थान पाने पर तामसिक शक्ति की प्रकृति कैसे बदलती है

स्थापना के बाद फिर बुलाने पर वह स्वयं को दूध के भोग पर रहने वाली सेविका घोषित करती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:43–16:17

वक्ता कहते हैं कि सब पूर्ण होने के बाद उस शक्ति का पुनः स्त्री के शरीर पर आह्वान हुआ, और उसने स्वयं कहा: "यहाँ अब मैं दूध के भोग पर रहूँगी, क्योंकि जिन महाशक्ति के सान्निध्य में मेरी स्थापना हुई है, उनके नियंत्रण में मैं पूरी तरह हूँ; भगवती का जो अंश यहाँ विराजमान है, उनकी सेविका के रूप में मैं यहाँ नित्य उपस्थित रहूँगी।" वे श्रोता से सोचने को कहते हैं कि इतनी प्रचंड शक्ति ने यह स्वयं कहा — किसी शक्ति की प्रकृति ऐसे बदलती है।

13

घटना: बेची गई ज़मीन पर श्मशान शक्ति का अघोषित स्थान

पहले के वाल्मीकि परिवार के सदस्य ने पेड़ के नीचे स्थापित की; किसी की गलती नहीं, फिर भी न बताने से खरीदार ने कष्ट भोगा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:18–17:04

वक्ता कहते हैं कि बाद में पता चला कि वहाँ पहले रहने वाले वाल्मीकि परिवार के किसी सदस्य ने काफी पहले श्मशान में जाकर श्मशान की शक्ति को शुद्ध किया था, अपने घर में स्थापित करके पूजा देता था और कुछ भक्ति के कार्य भी करता था। यह बात उसके अपने परिवार को भी सही से पता न थी; वे बस घर के बाहर पेड़ के नीचे के स्थान पर नित्य धूप-दीप करते रहे। बाद में ज़मीन दो-तीन लोगों को बेची गई, वह स्थान इसी खरीदार के हिस्से में आया, और किसी को जानकारी न थी — तो कोई पक्ष गलत न था, फिर भी न बताने के कारण इस परिवार को कष्ट भुगतना पड़ा। कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ; भगवती की कृपा से समय रहते बच गए।

14

कुलदेवी के नीचे कच्चे दूध और खीर से शांत हुई तामसिक शक्ति

भोग पर चलने वाली भगतई क्षेत्र की शक्ति जगदंबा का स्वरूप ऊपर आने पर शांत-सौम्य

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:05–17:33

वक्ता कहते हैं कि जगदंबा का वह स्वरूप ऊपर विराजने से परिवार को कुलदेवी की कृपा तो मिली ही, और वहाँ की तामसिक शक्ति — भोग आदि पर चलने वाली भगतई क्षेत्र की शक्ति — भी शांत और सौम्य हो गई। उसके लिए दूध की धार लगी; वह दूध में ही नहाई, दूध से ही शांत हुई, और उसका भोग कच्चा दूध रहा, उसी में खीर आदि उसका भोजन चढ़ा। उसी से वह संतुष्ट, सौम्य हुई और उसका स्वरूप भी बदला।

15

तामसिक तत्व के जाने का स्वप्न संकेत: मुंड और रक्त का प्याला लिए साँवली स्त्री

स्थापना के तीसरे दिन दिखा; सौम्य अंश परिवार की सवारी बनकर रहा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 17:34–18:21

वक्ता कहते हैं कि परिवार ने एक स्वप्न बताया: स्थापना के तीसरे दिन, जिस स्त्री पर वह शक्ति आती थी, उसे स्वप्न में एक पूरी साँवली, बिल्कुल काले रंग की स्त्री दिखी, बाल खुले, एक हाथ में मुंड और दूसरे में रक्त से भरा प्याला, जो बाहर की ओर जा रही थी। वह, वे कहते हैं, उस शक्ति का पहले वाला तत्व या गुण था, जो थावे वाली महारानी, जगदंबा कामाख्या की कृपा से चला गया; उसका सौम्य स्वरूप अंश रूप में वहाँ रह गया, जिसने कहा कि इस परिवार के लिए वह नित्य सवारी के रूप में आती रहेगी।

16

घटना की सीख: कुलदेवी की नियमित सेवा जीवन के संकट दूर करती है

नकारात्मक घटना ने परिवार को साधक बनाया जो अब संपन्न हैं; सही लोग मिलने से जल्दी राहत

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:22–19:28

वक्ता कहते हैं कि आज पति-पत्नी दोनों साधक-साधिका हैं, अच्छी साधना करते हैं और भगवती की कृपा से किसी चीज़ की कमी नहीं — धन-धान्य, पुत्र-पौत्र सब है। घटना बहुत नकारात्मक रही, पर उसने सब कुछ बदलकर उन्हें आध्यात्मिक मार्ग पर ला दिया। कष्ट उनके संक्षिप्त कथन से कहीं अधिक था; भगवती की कृपा यह रही कि सही लोग मिलने से चीज़ें जल्दी सुलझ गईं। उनकी समापन सीख यह है कि श्रोता अपनी कुलदेवी और कुल शक्ति की नियमित, सही और विश्वासपूर्वक सेवा-पूजा करके अपने जीवन में आए संकटों को दूर करें।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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