स्त्री साधना कैसे आरंभ करे — अविवाहित, नवविवाहित, संतानहीन और माँ के लिए नियम, और दीक्षा कैसे लें

तंत्र साधना में प्रवेश करने वाली स्त्री के लिए वक्ता द्वारा बताए गए चरण-दर-चरण नियम — अविवाहित कन्या, नवविवाहिता, संतानहीन पत्नी और माँ के रूप में — तथा हर स्थिति में दीक्षा कैसे लें।

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01

एक स्त्री यह कैसे तय करे कि साधना किस शक्ति से आरंभ करे?

कुंडली, मन का झुकाव और नियम निभा पाने की क्षमता

· Reviewed Sep 14, 2026 · 02:15–03:46 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि साधना में उतरने का निर्णय लेने वाली स्त्री पहले यह देखती है कि किन शक्तियों से आरंभ करना है, और इंटरनेट से पता चलता है कि साधना घर की शक्तियों, कुल पितृ और कुल शक्ति से आरंभ होती है। पर उससे भी पहले, वे कहते हैं, उसे अपनी जन्म कुंडली से देख लेना चाहिए कि किस क्षेत्र में साधना उसके लिए फलीभूत होगी, जो पुरुष और स्त्री दोनों पर लागू है, और उसका मन किधर लगता है: किस प्रकार की साधना में, किस देवता के स्वरूप में, और भगवती का कौन सा स्वरूप उसे सबसे अधिक आकर्षित करता है। वे कहते हैं कि यह सब पहले तय करना चाहिए क्योंकि शक्ति का जो भी स्वरूप पकड़ेंगी उसे लंबे समय तक लेकर चलना होगा, और यह भी देख लेना चाहिए कि उस शक्ति के नियम मान सकेंगी या नहीं और किस क्रम से चलेंगी। पूरी जानकारी के बिना, वे जोड़ते हैं, सेवा, पूजा और एक सीमा तक साधना की जा सकती है।

02

अविवाहित कन्या अपने कुल के पितरों और कुल शक्ति की पूजा अपने हाथों से क्यों न करे

कुल शक्ति एक बार, एक के द्वारा पूजित होती है; कन्या दूसरे घर के लिए सुरक्षित रखी जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:47–05:54

वक्ता कहते हैं कि अविवाहित कन्या को अपने मातृकुल के पितृ और कुल शक्ति की पूजा कभी अपने हाथों से नहीं करनी चाहिए। वे बिना नकारात्मकता के समझाते हैं: मातृशक्ति इसलिए कही गई क्योंकि उसमें नया जीवन देने की क्षमता है, और कन्या का पिता इतना बड़ा त्याग करता है कि अपनी पुत्री दूसरे वंश को उनके कुल की वृद्धि के लिए दान कर देता है; कुल शक्ति एक ही बार, किसी एक के द्वारा पूजित होती है, और कन्या ससुराल जाने वाली है, जहाँ की शक्तियाँ उसे पूजित करनी हैं। अगर वह पहले अपने कुल की शक्तियों और पितरों की पूजा कर लेगी तो, तंत्र क्षेत्र के नियम से, बहुत लोगों के घरों में कुल शक्तियों में जो अनेक चीज़ें समाविष्ट हो गई हैं वे उसके साथ चलने लगती हैं, जो नहीं होना चाहिए; वे कहते हैं कि आज यह इसलिए लग रहा है कि लोग ध्यान नहीं देते, पहले ऐसी चीज़ें क्लासिफाइड थीं। उसके साथ कुछ गलत नहीं होता, वे कहते हैं, पर जिस घर में वह जाएगी उन्हें परेशानी होगी, क्योंकि वहाँ की शक्तियाँ उसके साथ समाविष्ट नहीं हो सकेंगी।

03

अविवाहित कन्या स्वयं पूजा किए बिना अपनी कुल शक्ति का आशीर्वाद कैसे पाए

पिता या भाई उसके नाम से पूजा करें; वह एक दीपक जला सकती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:55–07:40

वक्ता कहते हैं कि अविवाहित कन्या जब साधना आरंभ करना चाहे तो उसके पिता उसके लिए प्रार्थना और कुल शक्ति का पूजन करें और वह हाथ जोड़कर बैठे और प्रार्थना करे; अगर उसे पता हो कि कुल की शक्तियाँ कौन हैं तो वह उनके लिए एक दीपक जला सकती है, पर पूरी पूजन व्यवस्था नहीं करनी चाहिए। कहीं-कहीं, वे कहते हैं, जहाँ कुल देवता पूजित होते हैं वहाँ अविवाहित कन्याओं का प्रवेश ही वर्जित होता है। क्योंकि तंत्र में कन्या की ऊर्जा बहुत महत्वपूर्ण है, और विशेषकर कौल मार्ग में उसे साक्षात शक्ति का स्वरूप मानकर पूजा जाता है, वह अपने पिता, बड़े भाई या छोटे भाई से कुल शक्ति के स्थान पर जो पूजा चाहे करवाए, फूल और चढ़ाने की चीज़ें उनके हाथ में दे, और वे उसके नाम से करें, शक्तियों से कहें कि हमारे कुल-वंश की बेटी साधना करना चाहती है, उसे सुरक्षा और आशीर्वाद दें। उसे अपने हाथ से भोग नहीं लगाना और पूजा नहीं करनी, विशेषकर जहाँ चौका या थान बना हो और कुलदेवी जागृत हों।

04

अविवाहित कन्या कुल पितरों के निमित्त कोई कार्य नहीं करती, अग्यारी भी नहीं

भाई या पिता करें; विवाह के बाद बात अलग हो जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:41–08:45

वक्ता कहते हैं कि अविवाहित कन्या को कुल पितृ के निमित्त कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए। कुल पितरों के लिए जो भी करना है वह भाई या पिताजी करेंगे, उसी प्रक्रिया से और जो भी विधि-विधान परिवार करता है, और विशेषकर अग्यारी करने की विधि कन्या को कभी नहीं करनी चाहिए। विवाह के बाद, वे कहते हैं, अगर कोई और नहीं कर रहा तो बात अलग हो जाती है, हालाँकि तब भी पितरों के निमित्त उसे करना ही नहीं चाहिए।

05

नवविवाहिता के लिए साधना नियम: एक वर्ष तक तामसिक और उग्र साधना, बलि और खप्पर वर्जित, तब तक पौराणिक उपासना

पहले जप, स्तोत्र और स्तुति; तंत्रोक्त मार्ग बाद में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:46–10:16

वक्ता कहते हैं कि नवविवाहिता को एक वर्ष तक भूलकर भी किसी प्रकार की तामसिक साधना नहीं करनी है; गृहस्थ आश्रम में हो तो स्त्री को तामसिक साधना करनी ही नहीं चाहिए, वे जोड़ते हैं। किसी उग्र शक्ति का सात्विक रूप से पूजन भी कम से कम एक वर्ष नहीं करना चाहिए: पूजा और सेवा हाँ, साधना नहीं। क्योंकि तंत्र साधना में बलि देनी होगी, चाहे नींबू या नारियल की, और शक्ति साधना पूरी तरह करने पर खप्पर चढ़ाना पड़ेगा, यह सब पहले वर्ष वर्जित है; गृहस्थी में है तो गृहस्थी के नियम का पालन करे। अगर उसी वर्ष में आरंभ करना चाहे तो वे कहते हैं कि अपनी चुनी शक्ति की तंत्रोक्त नहीं, पौराणिक साधना करे: उनके मंत्रों का यथाशक्ति जप, शतनाम का पाठ, किसी स्तोत्र का गायन, स्तुति, उन्हें प्रसन्न करना, और उसके बाद ही तंत्रोक्त मार्ग पर आगे बढ़े।

06

जिस विवाहिता को अभी संतान नहीं हुई, वह साधना कहाँ से आरंभ करे

कम से कम एक वर्ष ससुराल की कुल शक्ति; पितृ कार्य पति के हाथ से

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:17–11:15

जिस विवाहिता को अभी संतान नहीं हुई और आगे की योजना है, उसके लिए वक्ता कहते हैं कि उसकी पहली साधना उसी कुल की सेवा-पूजा होनी चाहिए जिसमें विवाह हुआ है: वहाँ की कुल शक्ति, कुल देवता, कुलदेवी और कुल भैरव, क्रम अनुसार पूजन। पितृ के निमित्त कार्य वह पति के हाथ से, ससुर जी के हाथ से, या जो भी वहाँ सेवा-पूजा करता हो उसके हाथ से करवाए; पति करेंगे तो उसे स्वतः प्राप्ति होगी, बोलने की भी ज़रूरत नहीं। वह स्वयं कुलदेवी, कुल देवता और कुल भैरव की सेवा-पूजा की विधि से आरंभ करे और, वे कहते हैं, कम से कम एक वर्ष यह करे, क्योंकि वहाँ की कृपा प्राप्ति उसके लिए सबसे आवश्यक है।

07

सावधानी: जहाँ मसानिक शक्तियाँ पूजित हों, संतानहीन पत्नी स्वप्न में दिया जाने वाला कोई वचन न ले

वचन लेने से कोख बंधित हो जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:16–11:46

खुलकर बोलते हुए वक्ता कहते हैं कि किसी-किसी के घर में मसान शक्तियाँ पूजित होती हैं। जिस विवाहिता को अभी संतान नहीं हुई, उसे तब ध्यान रखना है कि स्वप्न के माध्यम से या किसी भी माध्यम से कोई वचन देने का प्रयास हो रहा हो तो वह उसे न ले। नहीं तो, वे कहते हैं, गर्भ बंधन स्वतः हो जाएगा: कोख बंधित हो जाएगी, और संतान होने से पहले ही कोई ऐसा लाग लग जाएगा कि संतान की प्राप्ति होगी ही नहीं।

08

जिस पत्नी को अभी संतान नहीं हुई, उसके लिए श्मशानिक साधना, धार पूजन और चौराहा पूजन वर्जित

सात्विक रूप में भी नहीं, किसी के मार्गदर्शन में भी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:47–12:37

वक्ता कहते हैं कि जिस विवाहिता को अभी संतान नहीं हुई, उसे कोई श्मशानिक साधना नहीं करनी चाहिए, सात्विक रूप से भी नहीं, ऐसी भी नहीं जिसमें थोड़ा सा प्रावधान हो कि श्मशान में यह चीज़ डालनी है, क्योंकि उसे इन चीज़ों की सही जानकारी नहीं है; कहीं पढ़-सुनकर या किसी के मार्गदर्शन में भी कर रही हो तो भी वे मना करेंगे। वे स्पष्ट करते हैं कि यह वहाँ लागू है जहाँ उसमें या पति में कोई कमी नहीं और संतान की योजना बस दो-चार साल बाद की है। ऐसी स्थिति में, वे कहते हैं, श्मशानिक या मसान साधना, कोई धार पूजन, घर के बाहर जो करना हो, और चौक-चौराहा का पूजन, ये सब बिल्कुल न करें, क्योंकि कुछ गड़बड़ हुई तो जीवन भर परेशान होकर रह जाएँगी।

09

उग्र तंत्रोक्त साधना से पहले एक माँ को क्या करना चाहिए

पहले बच्चा दूध छोड़े, फिर संतान, घर और पति की लंबी सुरक्षात्मक साधना

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:38–13:35

जिस विवाहिता को पुत्र या पुत्री हो चुकी है और जो पूरी तरह तंत्रोक्त मार्ग में किसी ऐसी उग्र शक्ति की साधना में जा रही है जिसमें चौक-चौराहा का पूजन करना है, उसके लिए वक्ता कहते हैं कि सबसे पहली बात यह है कि उसका बच्चा इतना बड़ा हो कि माँ का दूध न पी रहा हो। दूसरी, तंत्रोक्त साधना में बढ़ने से पहले वह लंबे समय तक सुरक्षात्मक साधनाएँ करे: संतान की सुरक्षा हेतु कवच का निर्माण, घर की सुरक्षा हेतु घर का बंधन, और पति की सुरक्षा। उनकी सुरक्षा आवश्यक है, वे कहते हैं; उसके बाद ही ऐसी तंत्रोक्त साधनाएँ या पूजन करे।

10

विवाह की इच्छा रखने वाली अविवाहित स्त्री दीक्षा का मार्ग कैसे चुने

अघोर या उग्र दीक्षा ली तो उसी मार्ग का जीवनसाथी खोजना होगा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:36–15:18

वक्ता कहते हैं कि जिस अविवाहित स्त्री का भविष्य में विवाह होना है, वह दीक्षा सोच-समझकर चुने, क्योंकि उसे पता नहीं कि विवाह कहाँ होगा और जिस पंथ और गुरु परंपरा में गई है उसका विधि-निषेध विवाह के बाद न निभा पाई तो पूरी परेशानी होगी। आज बहुत लोग अविवाहित अवस्था में अघोर दीक्षा ले लेते हैं; ठीक है, वे कहते हैं, पर फिर ऐसा जीवनसाथी खोजना होगा जो कम से कम उस परंपरा का हो या उसकी जानकारी रखता हो। अघोर पंथ या उसी प्रकार की उग्र परंपरा में दीक्षित हो, सात्विक की बजाय तामसिक-उग्र साधना की ओर हो, और विवाह ऐसे व्यक्ति से हो जो ये सब सुनकर ही डर जाए, तो वह रात को ही भाग जाएगा। बहुत सी चीज़ें उसके शरीर पर प्रभाव डालेंगी, वे कहते हैं, और कुँवारेपन में की गई ऐसी साधनाओं का विवाह के बाद सबसे अधिक प्रभाव स्त्री पर पड़ता है, इसलिए दीक्षा का मार्ग ऐसा चुने कि विवाह के बाद परेशानी न हो।

11

क्या विवाहित स्त्री बिना पति के अकेले दीक्षा ले सकती है?

गुरु दीक्षा दोनों को एक ही गुरु से; मंत्र दीक्षा उसे अकेले भी दी जा सकती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:19–16:20 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि विवाहित स्त्री को कभी अकेले दीक्षा नहीं लेनी चाहिए, मार्ग कोई भी हो; तंत्र मार्ग में विवाहित स्त्री को बिना पति के दीक्षा लेनी ही नहीं चाहिए। पति की बात अलग हो सकती है: पत्नी साथ नहीं दे रही या नहीं ले सकती, और वह वीर मार्ग में जा रहा है, तो वह पहले अकेले दीक्षा लेकर साधना कर सकता है। पर स्त्री साधिका के लिए गुरु दीक्षा दोनों को एक साथ, एक ही गुरु से होनी चाहिए; साधना के मंत्र जो गुरु बाद में दीक्षा रूप में देते हैं वे उसे अकेले दें तो कोई दोष नहीं, पर दोनों की एक ही दीक्षा एक ही गुरु से होना अति आवश्यक है। वे जोड़ते हैं कि उग्र या तामसिक दीक्षा ले रही है और अभी पुत्रवती नहीं है, तो उस अवस्था के लिए बताए सारे नियम लागू रहेंगे।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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