YouTube देखकर किया नवार्ण मंत्र जप — साधिका के साथ क्या हुआ, और वक्ता के नियम

YouTube से सीखे बिना मार्गदर्शन के नवार्ण मंत्र जप की एक देखी हुई घटना — अनुभव, साधिका और परिवार को हुई हानि, विंध्याचल का उपाय — और नवार्ण, कुंजिका, अधिकार और गुरु मार्गदर्शन पर वक्ता के नियम।

13 notes, in the order they are taught. Jump to any one.

3 also answer a common question

Questions this answers

3 of the notes below are questions in their own right. Scroll for more.

The notes
EN हिंदी
01

वक्ता प्रयोग-मंत्र प्रसारित क्यों नहीं करते: मंत्र की ऊर्जा सीमित होती है

YouTube या Facebook से देखकर मंत्र करना; न संभली ऊर्जा गंभीर समस्या बन जाती है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:14–01:26

वक्ता कहते हैं कि वे एक ऐसी सत्य घटना रख रहे हैं जिसके वे स्वयं प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं, ताकि तंत्र प्रेमी यह समझें कि इंटरनेट, YouTube और Facebook पर हर विषय देखकर उछल-उछल कर करने से क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं। वे कहते हैं कि मंत्र की ऊर्जा सीमित होती है, और यदि कोई व्यक्ति उस ऊर्जा को संभाल न पाए और असंतुलित हो जाए तो बहुत दिक्कत वाला विषय हो जाता है — इसीलिए वे अपने चैनलों पर ऐसे मंत्र न प्रसारित करते हैं, न किसी को उन्हें करने के लिए प्रेरित करते हैं, और इसीलिए अधिकार का विषय बार-बार रखते हैं।

02

दो-चार सफल प्रयोगों के बाद स्वयं तांत्रिक बन जाने का भ्रम

न सिद्धि, न दीक्षा — फिर भी दो-चार सफलताएँ व्यक्ति को तांत्रिक होने का भ्रम दे देती हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:27–03:10

वक्ता कहते हैं कि साधिका ने लगभग 2016-17 में किसी व्यक्ति के चैनल को देखकर अभिचार नाश हेतु कुछ विशेष वामाचारी प्रयोग किए; उनसे उन्हें बड़ा तीक्ष्ण लाभ हुआ और विश्वास अकाट्य हो गया कि ऐसे प्रयोगों से उनका रक्षण हो सकता है। वे कहते हैं कि यह वह पैटर्न है जिसे वे कई बार लाइव में बोल चुके हैं: जो व्यक्ति अभिचार से ग्रसित होकर इस क्षेत्र में आता है और सुनते-सुनते, पढ़ते-पढ़ते अनुभव पाता जाता है, वह स्वयं ही तांत्रिक बन जाता है — या यों कहिए कि तांत्रिक बनने का भ्रम उत्पन्न हो जाता है। कोई विशेष सिद्धि नहीं की, कहीं दीक्षा नहीं ली, लेकिन दो-चार चीज़ें सफल हो गईं तो लगता है कि अब हम भी तांत्रिक हैं।

04

क्या बिना दीक्षा के भी मंत्र जप से अनुभव और पूर्वाभास हो सकते हैं?

दीक्षा हो या न हो मंत्र प्रभाव दिखाता है; शुभ ग्रह और जागृत अष्टम भाव इसे शीघ्र कर देते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:04–05:36 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि हाँ: साधिका की कोई दीक्षा नहीं थी, कुछ नहीं, फिर भी मंत्र ने अपना प्रभाव दिखाया — 9-10 दिन में ही सुगंधित वायु, स्वप्न में दक्षिणेश्वरी काली का उन्हें बुलाना, और दिव्य लोकों में घूमना; सवा लाख-दो लाख जप तक वे भगवती के प्रति पूरी तरह समर्पित हो गईं और पूर्वाभास होने लगे। वे जोड़ते हैं कि यदि उस समय व्यक्ति के ग्रह-नक्षत्र सही हों, शुभ ग्रहों का योग चल रहा हो, नवम भाव का कोई विशेष योग हो और अष्टम भाव जागृत हो, तो साधना के क्षेत्र में आते ही ये सब चीज़ें तुरंत मिल जाती हैं। जो पता नहीं था, वे कहते हैं, वह यह कि साधिका किस प्रकार की गलती कर रही थी।

05

बिना मार्गदर्शन के नवार्ण साधक को शक्तियाँ कैसे भ्रम देती हैं

स्वप्न में मिले मंत्र, दिव्य दृष्टि का संपुट, चार-पाँच लाख पर दर्शन, शरीर और घर की उपेक्षा

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:37–07:30

वक्ता कहते हैं कि जैसे-जैसे साधिका और जप की ओर बढ़ीं, शक्तियों ने भ्रम देना आरंभ किया: स्वप्न में उन्हें मंत्र मिलने लगे — यह मंत्र करो, यह देवता हैं, ये शक्तियाँ होती हैं — और जो भी विषय बताया जाता, वे उसे इंटरनेट पर खोजकर उसी के अनुसार करतीं। अनुष्ठान के लगभग दो महीने बाद उन्हें इंटरनेट पर नवार्ण से संबंधित कुछ मंत्र मिले जिनमें कहा गया था कि कुछ बीज मंत्रों का संपुट लगा देने से दिव्य दृष्टि पूरी तरह जागृत हो जाती है; दिव्य दृष्टि का मोह पहले ही जाग चुका था, और YouTube पर, वे कहते हैं, ऐसे विषयों की भरमार है। अभ्यास हो जाने से उनकी 108 माला अब साढ़े तीन-चार घंटे में पूरी हो जाती थी और उन्होंने संख्या और बढ़ा दी; साधना में अब भी केवल नवार्ण ही था, जिसे वे प्रणव के साथ कर रही थीं। चार से पाँच लाख के बीच उनकी अवस्था इतनी उग्र हो गई कि जिस भी शक्ति का ध्यान करतीं वह प्रत्यक्ष खड़ी लगती — जबकि वे अपने शरीर को नहीं देख रही थीं और घर को पूरी तरह छोड़ चुकी थीं।

07

बिना मार्गदर्शन के नवार्ण जप से आवेश, उच्चाटन और शरीर का टूटना

तीसरे महीने में साधिका का अपना शरीर टूटता है; स्रोत चैनल कहता है जप-हवन करते रहिए

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:17–10:31

वक्ता कहते हैं कि तीसरा महीना पूरा होते-होते साधिका के अपने शरीर में सबसे विकट परिस्थिति आरंभ हुई: लगातार दर्द, अपने ऊपर आवेश महसूस होना, लगभग हमेशा नशे जैसी स्थिति, कंधे भारी और मुंडी झुक जाना — यहाँ तक कि जो प्रतिदिन 150 माला तक कर लेती थीं, वे माला उठाने की अवस्था में भी नहीं रहीं। उच्चाटन और चिड़चिड़ापन शुरू हुआ, और शरीर पर लाल रंग के छाले पड़ने लगे। चार-पाँच महीने बाद उन्होंने उसी चैनल से संपर्क किया जिसके वीडियो देखकर शुरू किया था; वहाँ से कहा गया कि इसमें कोई दिक्कत नहीं, भगवती ने तो रक्षा ही की है, बस प्रतिदिन कुछ माला जप और हवन ज़रूर कीजिए। उन्होंने किया, पर शांति नहीं मिली; उच्चाटन बढ़ता गया, घर की समस्याएँ और कर्ज़ बढ़ते गए।

08

बिना मार्गदर्शन के जप से जागी शक्ति का घर-परिवार की शक्ति बनकर बलि माँगना

नींद में गला दबाना, गर्भाशय में गाँठ, बंद मासिक और साल पूरा होते-होते हैलुसिनेशन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:32–12:25

वक्ता कहते हैं कि अब दिखने वाली चीज़ों की जगह असली चीज़ दिखने लगी: सोते समय कोई स्त्री उनका गला दबाती, खींचती, और कहती कि माला जप नहीं हो रहा, तुम्हें जप करना होगा; कुछ समय बाद वह बलि माँगने लगी — "हम तुम्हारे घर-परिवार की शक्ति हैं, बलि दो, बलि देना ज़रूरी है, नहीं तो शांत नहीं होंगे।" भ्रम की अवस्था शुरू हुई: बलि देनी है या नहीं, यह कौन-सी शक्ति है, इस मंत्र से क्या जागृत हुआ। आसपास के लोग सटीकता से कुछ नहीं बता पाते थे। लगभग साल होने को आया, पूजा-पाठ छूट चुका था, तब कम उम्र में ही गर्भाशय में गाँठ बन गई, मासिक धर्म बंद हो गया, इलाज से लाभ नहीं हुआ, रासायनिक प्रतिक्रियाओं से शरीर फूल गया, और हैलुसिनेशन इतना बढ़ा कि यथार्थ और भ्रम में अंतर करना कठिन हो गया; मनोचिकित्सक की दवाइयों से बस नींद आती, जबकि आवाज़ कहती रहती: जप करो, तुमने क्यों छोड़ा, हमारी बलि नहीं दी।

09

गलत ढंग से किए नवार्ण जप के दोषों का विंध्याचल उपाय

माई से क्षमा याचना, सब जगह दर्शन, सप्तशती पाठ और क्षमा मंत्र का जप

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:26–13:28

वक्ता कहते हैं कि चार-पाँच साल अलग-अलग लोगों को दिखाने-सुनाने पर भी लाभ न होने के बाद, साधिका की कोलकाता में अपनी सहेली के नवचंडी अनुष्ठान में विंध्याचल के कुछ पुरोहितों से भेंट हुई। पूरा विषय सुनकर उन्होंने कहा कि ये दुष्प्रभाव उन मंत्रों के कारण हैं जो उन्होंने किए — मंत्र की ऊर्जा गड़बड़ कर रही है और उससे अनेक प्रकार के दोष उत्पन्न हो रहे हैं — और निर्देश दिया कि वे विंध्य क्षेत्र आकर माई से क्षमा याचना करें, यथासंभव सब जगह दर्शन करें, एक बार सप्तशती पाठ करवा लें, और क्षमा प्रार्थना तथा क्षमा मंत्र का जप करें, क्योंकि माँ बहुत दयालु हैं और क्षमा कर देंगी।

10

बुलाई गई शक्ति का अपनी बलि माँगना, और विंध्याचल में उसका शांत होना

"हमें बुलाया गया तो दिया क्यों नहीं" — नौ दिन गंगा स्नान और परिक्रमा, क्या सुधरा और क्या नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:29–15:01

वक्ता कहते हैं कि त्रिकोण यात्रा के समय काली खोह के पीछे भैरवनाथ के स्थान पर उनकी साधिका से भेंट हुई, जहाँ वे बहुत अधिक "खेल" रही थीं: अनुष्ठान हो चुका था, और अब उनके शरीर पर जो चीज़ें थीं वे अपना भोग माँग रही थीं — भोजपुरी में कहतीं कि हमें बलि चाहिए, हमें बुलाया गया है तो दिया क्यों नहीं गया, हम क्रुद्ध हैं। वहाँ के लोग शांत कराते: क्षमा कर दीजिए, जाने दीजिए, अनजाने में हुआ है — जिस पर उत्तर आता कि जब बुलाया है तो देना चाहिए। वे 9-10 दिन रहीं, प्रतिदिन गंगा स्नान किया, यथासामर्थ्य लघु परिक्रमा की और भगवती को मनाती रहीं; विक्षिप्तता ठीक हो गई, शरीर शांत हुआ, उच्चाटन और गाँठ की परेशानी बहुत हद तक ठीक हुई, और बाद में उन्होंने बताया कि थोड़ा-थोड़ा रक्तस्राव फिर शुरू हुआ है — जिसे उन्होंने क्षमा मिलने की निश्चितता माना।

11

बिना गुरु के मार्गदर्शन के नवार्ण या कुंजिका का कितना जप सुरक्षित है?

अपने घर की अनजानी ऊर्जाएँ जागती हैं; स्वयं करें तो केवल निश्चित कम मात्रा में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:02–15:59 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि सबसे ज़रूरी सीख यह है कि जब आप किसी मंत्र का जप करते हैं तो आप नहीं जानते कि उससे आपके घर की कौन-सी ऊर्जा, कौन-से देवी-देवता जागृत हो रहे हैं, कौन उसे स्वीकार कर रहा है और उससे कौन-सा उत्पात मचने वाला है। इसीलिए वे नवार्ण और कुंजिका को लेकर तटस्थ रहते हैं और बार-बार कहते हैं कि बिना विषय समझे न करें। हर जगह जो फल बताए जाते हैं वे होते तो हैं — पर विधिवत करने पर। यदि अपनी मनमर्जी से, बिना मार्गदर्शन के करें तो एक निश्चित, कम मात्रा में करें; अधिक मात्रा में ऊर्जा असंतुलित हो जाएगी, और साक्षात जगदंबा को प्रकट कर देने का सामर्थ्य न उनमें है न श्रोता में। नवार्ण, वे कहते हैं, अकेले सीधे करने का मंत्र नहीं है; उसके नियम हैं।

12

नवार्ण मंत्र को तंत्र की गायत्री क्यों कहा जाता है?

नौ चंडिकाओं का मंत्र जिसमें दसों महाविद्याएँ और नवदुर्गाएँ हैं; हलवा-पूरी की तरह बाँटा जाने वाला मंत्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:00–16:40 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि नवार्ण केवल दुर्गा जी का मंत्र नहीं है: वह उस भगवती की नौ चंडिकाओं का, उनकी नौ प्रमुख शक्तियों का मंत्र है; उसमें दसों महाविद्याएँ उपस्थित हैं, नवदुर्गाएँ उपस्थित हैं। इससे हर प्रकार की शक्ति जागृत हो जाती है और षट्कर्म के सभी विधान हो सकते हैं। वेद में गायत्री है, तंत्र में नवार्ण — तंत्र में नवार्ण के समकक्ष कोई दूसरा मंत्र नहीं माना गया। फिर भी, वे कहते हैं, इतने बड़े तांत्रिक मंत्र को आजकल लोग हलवा-पूरी की तरह बाँटते हैं — हर वीडियो में नवार्ण करो — जबकि कैसे करें, कितना करें, दीक्षा लेनी है या नहीं, बिना दीक्षा के कितना करें, इस पर कोई चर्चा नहीं करता।

13

तंत्र विद्या केवल योग्य गुरु के सान्निध्य में सीखें

फल आपको और आपके परिवार को भोगना है, YouTube के बाबाजी को नहीं; चैनल हर वर्ण के लिए पौष्टिक अनुष्ठानों तक सीमित

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:41–18:37

वक्ता कहते हैं कि उनका उद्देश्य भ्रम फैलाना नहीं, बल्कि यह कहना है: जागृत बनो। यदि आप बिना समझे अपनी मनमर्जी से करते हैं तो उसका विपरीत प्रभाव YouTube का बाबाजी या Facebook पर लिखने वाला बाबाजी नहीं भोगेगा — भोगना आपको और आपके परिवार को पड़ेगा। उनका चैनल गृहस्थों को समर्पित है, तांत्रिकों को नहीं; तंत्र विद्या सीखनी है और सिद्धियाँ पानी हैं तो किसी योग्य गुरु के सान्निध्य और मार्गदर्शन में जाएँ। वे केवल वही रखते हैं जो एक सामान्य गृहस्थ कर सकता है — ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सबके और स्त्री-पुरुष सबके कल्याण के लिए; उनके अनुष्ठान अधिकतर पौष्टिक होते हैं, बस एक-दो षट्कर्म से जुड़े (तंत्र काट, विवाह), और उनके पीछे भगवती की यही प्रार्थना है: सब बाधाओं से मुक्ति और धन-धान्य, पुत्र-पौत्र से संपन्नता।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

Explore this topic