अपूजित भैरव मंदिर की नित्य सेवा — कौन सा मंदिर चुनें, कैसे जाएं और क्या कटता है

अपूजित भैरव स्थान की नित्य सेवा पर एक प्रवचन।

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01

गृहस्थ की शुभ तिथियों पर मंदिर जाना

हमारी परंपरा में किन-किन दिनों मंदिर जाने के लिए कहा गया है?

· Reviewed Sep 2026 · 00:05–00:55 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जीवन का कोई भी शुभ कार्य हो या कोई भी शुभ दिवस हो, उस दिन मंदिर जाने के लिए अवश्य कहा गया है — अपने पंचांग के अनुसार जन्म की तिथि पर, विवाह की तिथि पर, और परिवार के किसी भी सदस्य का कोई भी शुभ दिवस आए तो उस दिन।

02

अन्य देवता का भक्त रहते हुए भैरव मंदिर जाना

महादेव या भगवती का भक्त भी नित्य भैरव जी के मंदिर जा सकता है — कौन सा मंदिर, कैसे जाना और क्या मिलेगा

· Reviewed Sep 2026 · 00:56–01:51

वक्ता इसे सत्र का क्लासिफाइड प्रश्न बताते हैं: हम महादेव के भक्त हैं तो महादेव के मंदिर जाते हैं, कोई भगवती के भक्त हैं तो भगवती के — पर महादेव और भगवती के भक्त रहते हुए भी यदि हम नियमित रूप से भैरव जी के मंदिर जाएं तो क्या होता है, कैसे जाना चाहिए, किस प्रकार के मंदिर में नित्य जाना चाहिए और उससे क्या प्राप्त होगा।

03

शिव स्वरूप भैरव, शक्तिपीठों के रक्षक, और भैरव एक पद

भैरव एक देवता हैं या एक पद, और वे कहां-कहां उपस्थित रहते हैं?

· Reviewed Sep 2026 · 01:52–03:04 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान भैरव साक्षात शिव के स्वरूप माने गए हैं; दंड देने का अधिकार सर्वप्रथम भैरव जी को काशी के क्षेत्र में दिया गया है; सभी शक्तिपीठों पर रक्षण हेतु भैरव उपस्थित रहते हैं, और ग्राम देवता तथा क्षेत्रपाल के रूप में भी वही रहते हैं। पर भैरव सिर्फ एक देवता नहीं हैं — जैसे इंद्र एक पद है, वैसे ही भैरव भी एक पद है।

04

जिस पर ऐसा आभिचारिक प्रयोग हो जिसका काट न मिल रहा हो

नित्य भैरव मंदिर किसे सबसे अधिक जाना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 03:05–03:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जिस व्यक्ति पर ऐसा आभिचारिक प्रयोग कर दिया गया हो जिसका काट ही नहीं हो पा रहा, उसे नित्य भैरव मंदिर अवश्य जाना चाहिए। स्त्री हो या पुरुष, यदि भैरव जी का मंदिर प्राप्त हो जाए तो नियमित रूप से जाना चाहिए, क्योंकि अभिचार कर्म में शमशानिक और नकारात्मक शक्तियां ही चलती हैं, और इन सभी के जिनके नीचे ये रहती हैं वे भगवान भैरव हैं।

05

शमशान भूमि की सीमा का निषेध, और गर्भावस्था

गृहस्थ को किस भैरव या काली मंदिर में नित्य नहीं जाना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 03:46–04:23 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि गृहस्थ को कभी भी नियमित रूप से ऐसे भैरव मंदिर या ऐसे काली जी के मंदिर में नहीं जाना चाहिए जो शमशान भूमि के भीतर हो। यदि मंदिर शमशान भूमि की सीमा शुरू होने से पहले है तो वहां नियमित जा सकते हैं। वहां भी ध्यान रहे — तीन माह से अधिक की गर्भवती स्त्री शमशान भूमि में या उसके आसपास के क्षेत्र के मंदिर में प्रवेश न करे, और जो पिता बनने वाले हैं उन्हें भी नहीं जाना चाहिए।

06

बड़े तीर्थ क्षेत्र शमशान सीमा के निषेध से मुक्त

अविमुक्तेश्वर काशी, उज्जैन का चक्र तीर्थ और तारापीठ इस निषेध से बाहर हैं — निषेध केवल सामान्य क्षेत्रों की शमशान भूमि पर है

· Reviewed Sep 2026 · 04:24–04:50

वक्ता कहते हैं कि वे अविमुक्तेश्वर क्षेत्र काशी इत्यादि की या उज्जैन के चक्र तीर्थ शमशान क्षेत्र की बात नहीं कर रहे — वे सामान्य क्षेत्रों की बात कर रहे हैं। उज्जैन महाकालेश्वर जाना या तारापीठ जाना इस निषेध में नहीं आता; यह निषेध आपके नगर, गांव और शहर के आसपास के सामान्य क्षेत्रों की शमशान भूमि पर लागू है।

07

न कटने वाला कष्ट, और अपूजित मंदिर

जिस अपूजित मंदिर में किसी एक दिन को छोड़कर दीपक भी नहीं जलता, उसे तुरंत पकड़ लेना चाहिए और उसकी नित्य सेवा उठा लेनी चाहिए

· Reviewed Sep 2026 · 04:51–05:26

वक्ता कहते हैं कि नियमित जाने का सबसे बड़ा कारण यह है कि जो प्रारब्ध, जो कर्म, जो कष्ट कहीं नहीं कट रहा हो, वह भैरव जी की कृपा से कटेगा। खोजना ऐसा मंदिर है जो अपूजित हो — जहां नियमित पूजा न होती हो, जहां लोग किसी विशेष दिन, जैसे रविवार को ही आकर पूजा करके चले जाते हों और बाकी दिन दीपक भी न जलता हो। ऐसे मंदिर को तुरंत पकड़ लेना चाहिए।

08

बिना दीक्षा भैरव के श्री विग्रह के स्पर्श का निषेध

क्या बिना दीक्षा के भैरव जी के श्री विग्रह का स्पर्श किया जा सकता है?

· Reviewed Sep 2026 · 05:27–06:02 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि नहीं — यदि आप दीक्षित नहीं हैं तो भैरव जी के श्री विग्रह को स्पर्श नहीं करना है। केवल यदि आप ऐसे पंथ, ऐसे संप्रदाय, ऐसी गुरु परंपरा में दीक्षित हैं जहां यह होता है, या आप भैरव जी के मंत्र से दीक्षित हैं और गुरु से आदेश प्राप्त है कि आप श्री विग्रह का स्पर्श कर सकते हैं, तभी स्पर्श करें। शिवलिंग का स्पर्श आप कर सकते हैं; भैरव जी के विग्रह का स्पर्श सीधे जाकर हर व्यक्ति को नहीं करना चाहिए।

09

अपूजित भैरव मंदिर पर तीन माह की निरंतर सेवा

बिना सेवा वाले भैरव मंदिर की 90 या 108 दिन की सेवा का विधान क्या है, और वह क्या काटती है?

· Reviewed Sep 2026 · 06:03–06:47 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि श्री विग्रह का स्पर्श किए बिना उनके समक्ष पुष्प और भोग रखकर, धूप-दीप जलाकर, भाव से भैरव सहस्रनाम या भैरव अष्टक या काल भैरव अष्टक का पाठ कीजिए, आरती करके लौट आइए। यदि ऐसा भैरव मंदिर मिल जाए जहां नित्य सेवा नहीं होती, और वहां आप सेवा आरंभ कर तीन महीने — 90 दिन या 108 दिन — लगातार जाएं, तो कितना भी बड़ा कोर्ट केस हो, झूठा मुकदमा हो, या आप पर कोई गलत प्रयोग हुआ हो, वे आपको हर कष्ट से मुक्त कर देंगे।

10

भैरव की शरणागति और भय से मुक्ति

भैरव की शरणागति लेने से क्या प्राप्त होता है?

· Reviewed Sep 2026 · 06:48–07:45 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवान भैरव की कृपा असीम है; वे विचित्र पुण्यों का वर्धन करने वाले हैं और अनेकों पापों का शमन करने की क्षमता रखते हैं, तथा जो उनकी शरणागति प्राप्त करता है वह हर प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है। इसलिए किसी भी कष्ट या बड़ी विपत्ति में भैरव की शरणागति स्वीकार कीजिए, उनके शरणागत हो जाइए, और ऐसा मंदिर खोजने का प्रयास कीजिए जो अपूज्य हो, जहां पूजा कम होती हो और लोग हमेशा न जाते हों।

11

स्त्री का भैरव सेवा का अधिकार, और उग्र स्वरूप के सामने न खड़े होने का नियम

क्या स्त्री भैरव जी की सेवा कर सकती है, और उग्र विग्रह के समक्ष कैसे खड़ा होना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 07:46–08:23 · Also a question

जब स्त्री साधिका से लोग कहते हैं कि स्त्री भैरव जी की सेवा नहीं कर सकती, इस पर वक्ता उत्तर देते हैं: बिल्कुल नहीं, ऐसा नहीं है। मना श्री विग्रह के स्पर्श के लिए है, और वह पुरुषों के लिए भी मना है। जहां स्वरूप उग्र हों — शमशान काली, शमशान भैरवी, शमशान के सभी श्री विग्रह, या कोई भी विग्रह जिसका निर्माण उग्र रूप में हुआ हो — उनकी पूजा सामने से नहीं की जाती, और गृहस्थ को उनकी आंखों के समक्ष खड़े होकर, आंख मिलाकर मंत्र जप नहीं करना चाहिए। जो गृहस्थ से विरक्त हो चुके हैं वे करें, यह अलग बात है; श्रोता को नहीं करना चाहिए।

12

विग्रह के बगल में खड़ा होना, काले तिल का चौमुख दीपक, और भोग

उग्र विग्रह के बगल में खड़ा होना, सामने कभी नहीं; और भोग से पहले काले तिल की ढेरी पर चौमुख दीपक

· Reviewed Sep 2026 · 08:24–08:59

वक्ता कहते हैं कि यदि काल भैरव का मंदिर हो और वहां वे उग्र स्वरूप में स्थापित हों, तो पूजा किनारे से खड़े होकर की जाती है — आप श्री विग्रह के ठीक बगल में खड़े होंगे, सामने नहीं। सर्वप्रथम दीपक ही जलाना चाहिए: काले तिल की ढेरी बनाकर चौमुख दीपक, उसमें दो लौंग, एक इलायची और कपूर डालकर, भैरव जी के नाम से प्रज्वलित करें। उसके पश्चात इमरती, जलेबी, या अपने हाथ से बना दही बड़ा, पापड़, या कोई भी मीठा मिष्ठान भोग लगाएं; फिर फूल, इत्र, और सुगंधित धूप या आजकल आने वाला गूगल वाला कप संभरणी अच्छे से जलाएं।

13

संकल्प सहित पाठ, और कपूर-लौंग से पांच आरती

कष्ट से मुक्ति के संकल्प के साथ भैरव सहस्रनाम या काल भैरव अष्टक का पाठ, और कपूर तथा दो लौंग से पांच बार आरती

· Reviewed Sep 2026 · 09:00–09:26

वक्ता कहते हैं कि धूप के पश्चात यह संकल्प लेकर कि "हे भगवान भैरव, मुझे इस कष्ट से मुक्त करें", भैरव सहस्रनाम या काल भैरव अष्टक का पाठ कीजिए। फिर ढेला वाले कपूर में दो लौंग रखकर उससे आरती कीजिए, पांच बार आरती दिखाकर उसे भैरव जी के पास रखकर, क्षमा प्रार्थना इत्यादि करके यह कहिए कि सारा पुण्य हे भगवान भैरव आपको समर्पित है — फिर जल छोड़कर लौट आइए।

14

नैवेद्य का मंदिर के बाहर वितरण

भैरव जी को लगाए गए भोग का क्या करना चाहिए?

· Reviewed Sep 2026 · 09:27–09:56 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो भोग लगेगा, यदि आप पुरुष हैं और उसे ग्रहण करते हैं, तो मंदिर के ठीक बाहर वहीं का वहीं नैवेद्य ग्रहण कर लेना है। अथवा उसे छोटे बच्चों में बांट सकते हैं, या वहीं के सेवकों को दे देना चाहिए कि वही भक्षण करें, या स्वान को दे देना चाहिए — रख देना चाहिए कि वे जहां भी मिले खा लें। स्वयं थोड़ा सा ले लेना चाहिए, और बाकी सारा वहीं सभी को खिला देना चाहिए।

15

न जागृत होने वाले मंत्र, और जप के दोष

जिसके मंत्र सिद्ध नहीं हो रहे, उसके लिए भैरव सेवा क्या करती है?

· Reviewed Sep 2026 · 09:57–10:24 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो लोग सिद्धियों के पीछे पड़े रहते हैं और सिद्धि नहीं मिल रही, मंत्र सिद्ध नहीं हो रहा, मंत्र प्रभाव नहीं दे रहे — ऐसे व्यक्ति को भैरव जी की सेवा करके देखनी चाहिए। हर प्रकार के मंत्र पूर्ण रूप से जागृत ही नहीं होंगे, वरन जब भी आप संकल्प लेकर उनका प्रयोग करेंगे तो वे पूरा प्रभाव देने लगेंगे। जप में कोई भी गलती, यानी मंत्र के उच्चारण और उनके जप में जो दोष होता है, वह भैरव की कृपा से शमन होता है, और भैरव जी की सेवा से यह दोष भी समाप्त हो जाएगा।

16

श्राप और प्रायश्चित के लिए अपूज्य श्री विग्रह की शरणागति

यदि किसी पर श्राप हो, या वह किसी हत्या या पाप का प्रायश्चित करना चाहता हो, तो क्या करे?

· Reviewed Sep 2026 · 10:25–10:57 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आपको कोई दोष लग गया हो, किसी प्रकार का श्राप लग गया हो, किसी जीव के द्वारा आपको श्राप लगा हो, आपसे अनजाने में कोई हत्या हो गई हो, या आपने जानबूझकर कोई ऐसा पाप कर दिया हो जिसका अब आप प्रायश्चित करना चाहते हों और आपको लग रहा हो कि कोई देवी-देवता आपको शरणागति नहीं देने वाला — तो आपको भगवान भैरव के ऐसे मंदिर की, ऐसे श्री विग्रह की शरणागति लेनी चाहिए जो अपूज्य हो। अपूज्य का अर्थ है जहां नियमित पूजन न हो, या बहुत कम पूजा होती हो।

17

मंदिर और उसके आसपास की साफ-सफाई, और श्वान सेवा

मंदिर और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई, और कुत्तों को बाहर ही नमकीन तथा मीठी रोटी खिलाना — घर लाकर बांधना नहीं

· Reviewed Sep 2026 · 10:58–11:40

वक्ता कहते हैं कि भैरव जी के ऐसे मंदिर की सेवा में उसकी साफ-सफाई आती है — उस जगह की, उस मंदिर की और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई — और कुत्तों की सेवा, यानी कुत्तों को नमकीन रोटी और मीठी रोटी खिलाना, तथा जितना हो सके उनके लिए जल और भोजन की व्यवस्था कर देना। वे स्पष्ट कहते हैं कि वे घर में लाकर बांधने के लिए नहीं बोल रहे हैं: सेवा बाहर ही करनी है।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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