Geeta Gyan · गीता ज्ञान
पूरी गीता, श्लोक दर श्लोक
The Bhagavad Gītā in 53 Hindi satsangs of about an hour. Every verse is sung in Sanskrit, then explained, read inside the Mahābhārata.
अध्याय 1
अध्याय 2
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गीता सार - अध्याय 2
उलझन में किससे पूछें; "मैं नहीं जानता" कहना शुरुआत क्यों है
गीता 2.1–2.10
78 min -
गीता सार - अध्याय 2
अपनों की मृत्यु का दुःख और अपनी मृत्यु का डर
गीता 2.11–2.25
79 min -
गीता सार - अध्याय 2
अनिवार्य का शोक, और डर के आगे अपना कर्तव्य
गीता 2.26–2.38
76 min -
गीता सार - अध्याय 2
नतीजे की चिंता में काम बिगड़ना
गीता 2.39–2.53
78 min -
गुस्सा कहाँ से आता है
चाह से गुस्सा, गुस्से से भ्रम: मन की जंजीर
गीता 2.54–2.63
76 min -
शांति के बिना सुख कहाँ
भरा हुआ समुद्र: इच्छाएँ आएँ पर मन न डोले
गीता 2.64–2.72
72 min
अध्याय 3
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काम छोड़ दूँ या करता रहूँ?
ज़िम्मेदारियाँ छोड़कर भागने का मन; देने-लेने का चक्र
गीता 3.1–3.16
78 min -
बड़े जो करते हैं, सब वही करते हैं
घर और समाज के लिए हम क्या उदाहरण बनते हैं
गीता 3.17–3.29
76 min -
मन मेरी बात क्यों नहीं मानता
जानते हुए भी गलत क्यों कर बैठते हैं; इच्छा, असली शत्रु
गीता 3.30–3.43
79 min
अध्याय 4
अध्याय 5
अध्याय 6
अध्याय 7
अध्याय 8
अध्याय 9
अध्याय 10
अध्याय 11
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मुझे अपना असली रूप दिखाओ
भगवान को देखने की चाह; दिव्य दृष्टि
गीता 11.1–11.14
78 min -
जब भगवान का रूप डरा दे
भगवान केवल मीठे नहीं; विराट का भय
गीता 11.15–11.31
83 min -
मैं काल हूँ, तुम निमित्त हो
समय और विनाश का डर; "सखा समझकर जो कहा, क्षमा करो"
गीता 11.32–11.44
78 min -
फिर से वही प्यारा रूप
डर से प्रेम तक; केवल भक्ति से दर्शन
गीता 11.45–11.55
76 min
अध्याय 12
अध्याय 13
अध्याय 14
अध्याय 15
अध्याय 16
अध्याय 17
अध्याय 18
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असली त्याग क्या है
काम छोड़ना या फल छोड़ना
गीता 18.1–18.12
75 min -
करने वाला कौन?
"मैं करता हूँ" का बोझ; पाँच कारण
गीता 18.13–18.28
80 min -
ज़हर पहले, अमृत बाद में
तीन तरह की बुद्धि, धैर्य और सुख
गीता 18.29–18.40
74 min -
अपना काम ही पूजा
मेरा काम छोटा है? हर काम में कुछ दोष
गीता 18.41–18.53
75 min -
सब छोड़कर मेरी शरण आओ
अंतिम भरोसा: शरणागति
गीता 18.54–18.66
76 min -
मोह नष्ट हुआ
"मैं वही करूँगा", और जहाँ कृष्ण वहाँ विजय
गीता 18.67–18.78
77 min