तंत्र चर्चा प्रश्नोत्तरी 17 — कवच पाठ, पैर का बंद, प्रत्यंगिरा की सावधानी, पुष्पार्चन विधि और महाभैरव तक का मार्ग

कवच पाठ, साधक का पैर का बंद, प्रत्यंगिरा की सावधानी, तारा और भैरव की तिथियाँ, पुष्पार्चन विधि, पीड़ित चंद्रमा, ज्येष्ठ के पर्व और महाभैरव से पहले पंचाक्षरी की पूर्व-शर्त पर श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर।

22 notes, in the order they are taught. Jump to any one.

3 also answer a common question

Questions this answers

3 of the notes below are questions in their own right. Scroll for more.

The notes
EN हिंदी
01

कवच का पाठ कभी मौन रहकर नहीं होता

पाठ करने वाला कम से कम स्वयं सुन सके

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:27–01:44

बटुक भैरव ब्रह्म कवच के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि किसी भी कवच का पाठ कभी मौन रहकर नहीं किया जाता — यह हर कवच पर लागू है। वे कहते हैं कि कम से कम इतना अवश्य हो कि आप अपना पाठ स्वयं सुन सकें।

एक श्रोता बटुक भैरव ब्रह्म कवच के बारे में पूछते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि कवच का पाठ कभी भी मौन रहकर नहीं किया जाता, और यह बात किसी भी कवच पर लागू होती है। वे कहते हैं कि कम से कम इतना अवश्य होना चाहिए कि आप जो पाठ कर रहे हैं उसे आप स्वयं सुन सकें।

02

दत्तात्रेय के 108 नाम से तर्पण कहाँ करें

पीपल का वृक्ष या पात्र, नर्मदेश्वर शिवलिंग नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:45–03:04

वक्ता कहते हैं कि भगवान दत्तात्रेय के 108 नाम से तर्पण नर्मदेश्वर शिवलिंग पर न करें। जैसा वे पहले बता चुके हैं, इसे पीपल के वृक्ष पर करना विशेष है; घर पर करना हो तो पात्र में ही करें, क्योंकि शिवलिंग पर ऐसा करना उचित नहीं रहेगा।

03

कवच का समर्पण पाठ के अंत में किया जाता है

कवच पाठ में समर्पण का स्थान

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:05–03:09

वक्ता कहते हैं कि कवच का समर्पण पाठ के अंत में किया जाता है — वह अवश्य किया जाएगा, और पाठ के अंत में ही किया जाएगा।

कवच का समर्पण कब हो, इस प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि कवच का समर्पण पाठ के अंत में किया जाएगा। वे कहते हैं कि वह बिल्कुल किया जाएगा, और उसका स्थान पाठ के अंत में है।

04

तारा शतनाम स्तोत्र और हवन: केवल दीक्षितों के लिए

उनका हवन उग्र है और उनकी शक्तियाँ आती हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:10–03:52

भगवती तारा के शतनाम स्तोत्र के जप के बाद घर पर हवन किस नाम से करें, इस प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि वह स्तोत्र तभी करें जब आप दीक्षा प्राप्त हों; अन्यथा शिव जी या भगवती के मंदिर में जप और समर्पण करें। उनके हवन की विधि थोड़ी उग्र रहती है — आवश्यक नहीं कि सामान्य ऊर्जा ही प्रक्षेपित हो — और उनका हवन करने पर उनकी शक्तियाँ और सेविकाएँ आती हैं, इसलिए वैसी तैयारी न हो तो दिक्कत होगी।

05

हनुमान शतनामावली बिना बीज के की जा सकती है

बिना बीज के स्तोत्र पाठ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:53–04:05

वक्ता कहते हैं कि भगवान श्री हनुमान जी की स्तोत्र शतनामावली बिल्कुल बिना बीज के की जा सकती है।

इस बारे में पूछने वाले श्रोता से वक्ता कहते हैं: हाँ, बिल्कुल आप बिना बीज के कर सकते हैं — भगवान श्री हनुमान जी की स्तोत्र शतनामावली।

06

शिव सहस्रनाम में उच्चारण की गलतियाँ: धीरे-धीरे सीखें

गलती कोई दोष नहीं; पाठ में हड़बड़ी न करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:06–04:24

जिस श्रोता ने मंदिर में शिव सहस्रनाम पढ़ना शुरू किया है और जिसे संस्कृत कठिन लगती है, उनसे वक्ता कहते हैं कि बोलने में गलती हो जाए तो कोई दिक्कत नहीं — धीरे-धीरे सुधार कीजिए। शुरू में हड़बड़ाकर पाठ मत कीजिए; धीरे-धीरे पढ़िए, उच्चारण ठीक से सीखिए, तब कीजिए।

07

बगला प्रत्यंगिरा कवच: धारण करें, पाठ न करें

धारण से पाठ का अधिकार नहीं मिलता; पाठ उन दीक्षितों का है जिन्होंने उसका निर्माण किया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:25–05:10

वक्ता कहते हैं कि उन्होंने कहीं नहीं कहा कि बगला प्रत्यंगिरा कवच का पाठ करें। कवच धारण किया जा सकता है, और आप भगवती के सामान्य सौम्य स्वरूपों का अनुष्ठान करते रहिए। कवच धारण करने का अधिकार होने का यह अर्थ नहीं कि पाठ का भी अधिकार मिल गया — जो उसके पुरश्चरण में दीक्षित हैं उन्होंने उसका निर्माण किया है, और हर कोई हर चीज़ का निर्माण नहीं कर सकता। पाठ केवल उन सौम्य स्वरूपों का करें जो आप अब तक करते आए हैं; इसमें ज़्यादा होशियारी न दिखाएँ, नहीं तो जो उत्पात होगा उसके ज़िम्मेदार आप स्वयं होंगे।

08

महा प्रत्यंगिरा: हर प्रत्यंगिरा स्वरूप की मूल

प्रत्यंगिरा एक नहीं; उनके अनुष्ठान जोड़ने पर महा उग्र

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:11–06:22

वक्ता कहते हैं कि सदैव स्मरण रखें कि भगवती प्रत्यंगिरा भगवती का कोई सामान्य शक्ति-पुंज नहीं, बल्कि अत्युग्र, उग्रतम स्वरूप हैं; यदि महा प्रत्यंगिरा भी साथ हो जाएँ तो वे अति उग्र हो जाती हैं। भगवती महा महाप्रत्यंगिरा वह मूल स्वरूप हैं जो जितनी भी शक्तियाँ हैं, सबके प्रत्यंगिरा स्वरूप को प्रकट करती हैं, इसीलिए प्रत्यंगिरा केवल एक नहीं हैं — बगला प्रत्यंगिरा हैं, तारा प्रत्यंगिरा हैं। इनमें से किसी के साथ महा प्रत्यंगिरा का पूजन-अनुष्ठान हो जाए तो वह महा उग्र हो जाता है। इसलिए इन शक्तियों से छेड़छाड़ न करें; जो विधि-नियम है उसके अनुसार चलें। उनका कवच धारण करने में कोई दोष नहीं, पर उसका प्रॉपर जप अधिकृत लोग ही करेंगे।

09

साधक का पैर का बंद: किस पैर में और किस धातु का

एक पैर, दाहिना, चाँदी सर्वश्रेष्ठ; ताँबा-स्वर्ण केवल कुंडली अध्ययन के बाद

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:23–07:44

भगतवाल में काम करने वालों की पैर की बेड़ी (बंद) के बारे में पूछे जाने पर वक्ता कहते हैं कि यह केवल उनके लिए नहीं है — हर साधक को पहनना चाहिए। एक पैर का बंद सभी के लिए आवश्यक है और वही सर्वश्रेष्ठ भी है; दोनों पैर का बंद सभी के लिए नहीं है और उसमें परंपरा के अनुसार भी बहुत सारे विषय आ जाते हैं। इसे दाहिने पैर में धारण करना चाहिए, और चाँदी का सर्वश्रेष्ठ होता है; ताँबा और स्वर्ण हर किसी के लिए नहीं हैं, वे पूरी जन्म कुंडली के सही अध्ययन के बाद ही धारण किए जा सकते हैं — शरीर में किस तत्व की अधिकता है और कौन सी धातु किस पर कैसा प्रभाव दे सकती है।

10

रक्षक देवता से पैर के बंद का अभिमंत्रण

भैरव, हनुमान, गणपति या नरसिंह; पहना हुआ बंद फिर पूजा स्थान पर नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:45–08:36

वक्ता कहते हैं कि पैर के बंद को रक्षक देवताओं के मंत्रों से विमंत्रित करना सर्वश्रेष्ठ है। धारण करने से पहले भैरव जी, हनुमान जी, गणेश जी या नरसिंह जी में से किसी एक स्वरूप की शक्ति को समर्पित करें: उनका पूजन करें, बंद को कच्चे दूध से स्नान कराएँ, धूप-दीप दें, अच्छे से सुगंधित करें, उन्हें समर्पित करके कम से कम एक दिन रखें — अधिक दिन रखें तो और अच्छा; जैसे नवरात्रि की प्रतिपदा को भैरव जी को चढ़ाकर दशमी को पुनः पहनें। चढ़ाया हुआ बंद पहन सकते हैं, लेकिन एक बार पैर में चला गया तो फिर कभी पूजा स्थान पर नहीं रखना है।

11

क्या पंचमुखी हनुमान कवच अभिचार-पीड़ित घर में सिद्ध किया जा सकता है?

कवच पाठ पहले पीड़ित करने वाली शक्ति को उकसाता है; हनुमान मंदिर में करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:37–09:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यह घर की स्थिति के स्तर पर निर्भर करेगा। यदि घर में पहले से उत्पात मचा है और आप कवच शुरू करेंगे तो उत्पात और बढ़ जाएगा, और आप कहने लगेंगे कि कवच करने से दिक्कत बढ़ गई। वास्तविकता यह है कि आपके पाठ से वह शक्ति परेशान होती है, जबकि नया-नया शुरू करने पर आपकी ऊर्जा को उसके स्तर तक बनने में समय लगता है — तो वह बदले में आपको परेशान करती है। अभिचार से पीड़ित लोग यदि बजरंग बाण या पंचमुखी हनुमान कवच की सिद्धि, अनुष्ठान या पुरश्चरण सोच रहे हैं तो घर के बाहर किसी हनुमान मंदिर में करें, वही सर्वश्रेष्ठ है।

12

तारा या बटुक भैरव की साधना किस तिथि से शुरू करें?

तारा के लिए कृष्ण पक्ष की नवमी या चतुर्दशी; भैरव के लिए मासिक कालाष्टमी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 09:30–10:01 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि भगवती तारा के लिए या तो नवमी या चतुर्दशी लें — कृष्ण पक्ष की नवमी अथवा चतुर्दशी। भैरव जी के लिए मासिक कालाष्टमी व्रत है, कृष्ण पक्ष की अष्टमी।

जो श्रोता भगवती तारा या बटुक भैरव जी की साधना करना चाहते हैं, उनसे वक्ता कहते हैं: भगवती तारा के लिए या तो नवमीपक्ष की नवीं तिथि, जिस पर नवरात्र का अनुष्ठान पूर्ण होता है। या चतुर्दशी कीजिए। भैरव जी के लिए मासिक कालाष्टमी व्रत है — कृष्ण पक्ष की अष्टमीपक्ष की आठवीं तिथि, जो शाक्त कर्मों के लिए विशेष अनुकूल मानी जाती है।। और भगवती के लिए, वे दोहराते हैं, कृष्ण पक्ष की नवमी अथवा चतुर्दशी।

13

पीड़ित चंद्र से अकारण दुख और उसका उपाय

भावपूर्वक शिव स्तुति गाना, नाममात्र का पाठ नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:02–11:21

मन प्रसन्न न रहे तो क्या करें, इस प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि कारण अनेक हैं, लेकिन चंद्रमा मन का कारक है, और चंद्र जब भी पीड़ित होगा तो आप अकारण ही दुखी रहेंगे — देख लें कि गोचर में या 6, 8, 12 में चंद्र है या चंद्र-केतु, चंद्र-राहु का योग है। सर्वश्रेष्ठ उपाय है भगवान शिव की उपासना उनकी स्तुति गाकर करना: भावपूर्वक गाने पर यह दिक्कत झट से दूर होती है, जबकि उस कॉस्मिक एनर्जी से जुड़े बिना नाममात्र का पाठ कोई लाभ नहीं देता। मन को सबल बनाना है, उस दिव्य ऊर्जा से जोड़ देना है; यह सफल हो जाए तो कोई भी योग आपको दुखी नहीं कर पाएगा।

14

पुष्पार्चन की विधि: आरंभ के कृत्यों से समर्पण तक

शतार्चन या सहस्रार्चन का पूरा क्रम

· Reviewed Sep 14, 2026 · 11:22–13:11

वक्ता पुष्पार्चन की विधि बताते हैं: पहले आरंभ की पूरी प्रक्रिया — आचमन, प्राणायाम, पवित्री धारण, शिखा बंधन और आसन विधि — फिर स्वस्तिवाचन, संकल्प, गुरु-गणपति पूजन, फिर भैरव, नरसिंह और हनुमान जी का पूजन (संक्षिप्त या वृहद)। आवाहन मंत्रों के बाद जिस स्वरूप का अर्चन करना है उसी का ध्यान करें, आवाहन के लिए तांत्रोक्त देवीसूक्तम् का प्रयोग करें; भगवती के तत्व अवश्य उपस्थित होंगे और प्रतिष्ठित विग्रह या यंत्र की ऊर्जा जागृत हो जाएगी। फिर उस देवता का कवच पढ़ें, पुष्प में कुंकुम, हरिद्रा और सुगंधित द्रव्य मिलाएँ, और शतनामावली या सहस्रनामावली के प्रत्येक नाम से सामग्री यंत्र या विग्रह पर छोड़ते जाएँ। सहस्रार्चन पूरा होने पर आरती, क्षमा प्रार्थना, स्तुति और समर्पण करें।

15

मंदिर में किसी अपरिचित का पूजा का जल ले लेना कोई दोष नहीं

विश्वास मज़बूत करें, अंधविश्वासी न बनें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 13:12–14:12

मंदिर में किसी अपरिचित ने शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए उनका जल का लोटा माँग लिया, यह सही है या गलत, इस प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि उसके पास जल की कमी होगी, चढ़ाना होगा तो माँग लिया। विंध्याचल मंदिर में गाँव की स्त्रियाँ आपका लोटा उठाकर थोड़ा सा जल ले जाती हैं और चढ़ा देती हैं, इसमें कोई बड़ा विषय नहीं। इतना मत सोचिए: हमें अपने विश्वास को मज़बूत करना है, लेकिन अंधविश्वासी नहीं बनना है।

16

देवी की दैनिक उपासना का क्रम: कवच, शतनाम स्तोत्र, जप, भवानी अष्टकम

एक दैनिक क्रम जिसे वक्ता सही बताते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:13–14:22

एक श्रोता देवी जी के लिए अपना दैनिक क्रम बताते हैं — पहले कवच, फिर शतनाम स्तोत्र, फिर मंत्र जप, फिर भवानी अष्टकम का पाठ — और पूछते हैं कि क्या यह सही है। वक्ता कहते हैं कि एकदम सही है, वे बहुत अच्छा कर रहे हैं।

एक श्रोता देवी जी के लिए अपना दैनिक क्रम बताते हैं: पहले कवच, फिर शतनाम स्तोत्र, फिर मंत्र जप, और फिर भवानी अष्टकम का पाठ। वे पूछते हैं कि क्या यह सही है। वक्ता पुष्टि करते हैं: एकदम, वे कहते हैं — श्रोता इस क्रम से बहुत अच्छा कर रहे हैं।

17

43 दिन की तारा स्तोत्रम साधना: केवल दीक्षा के बाद

तारा, कामाख्या का तांत्रिक स्वरूप, धूमावती और त्रिपुर भैरवी मज़ाक नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:23–15:47

43 दिन के तारा माँ स्तोत्रम के अंतिम दिन क्या करें, इस प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि वे सदैव कहते हैं कि तारा माँ की ये सब साधनाएँ दीक्षा लेकर करनी चाहिए। 43 या 41 दिन की साधना की चर्चा उन्होंने इस चैनल पर कभी नहीं की, इसलिए जहाँ से देखा-सुना है, या जो आपके गुरु-मार्गदर्शक हैं, उनसे पूरी विधि जान लें। तारा खिलवाड़ नहीं है; भगवती तारा, कामाख्या माई का तांत्रिक स्वरूप, भगवती धूमावती और त्रिपुर भैरवी मज़ाक नहीं हैं।

18

भगवती का त्रिशूल स्थापित करने का दिन: अरण्य षष्ठी

त्रिशूल स्थापना के लिए विंध्यवासिनी जयंती

· Reviewed Sep 14, 2026 · 15:48–16:01

भगवती का त्रिशूल अगली बार कब स्थापित कर सकते हैं, इस प्रश्न पर वक्ता कहते हैं कि 1 जून को विंध्यवासिनी षष्ठी आने वाली है — दिव्य से दिव्य विंध्यवासिनी जयंती, अरण्य षष्ठी — उसी दिन करें।

एक श्रोता पूछते हैं कि भगवती का त्रिशूलशिव और देवी का त्रिशूल, जो शक्ति स्थल पर भी स्थापित किया जाता है। अगली बार कब स्थापित कर सकते हैं। वक्ता उत्तर देते हैं कि विंध्यवासिनी षष्ठी आने वाली है, 1 जून को — दिव्य से दिव्य दिन, विंध्यवासिनी जयंती, अरण्य षष्ठी। उसी दिन कीजिए, वे कहते हैं।

19

ज्येष्ठ के तीन महापर्व: अमावस्या, अरण्य षष्ठी, गंगा दशहरा

बृहस्पतिवार और हस्त नक्षत्र में गंगा दशहरा सर्व सिद्ध मुहूर्त

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:02–18:05

वक्ता तीन महापर्वों की घोषणा करते हैं: ज्येष्ठ की अमावस्या (शायद 25 तारीख) को गुप्त दुर्गा की जयंती और शनि जयंती; 1 तारीख को अरण्य षष्ठी, विंध्यवासिनी जयंती और वन दुर्गा जयंती; और 5 तारीख को हस्त नक्षत्र युक्त बृहस्पतिवार की दशमी — गंगा अवतरण दिवस, गंगा जयंती, गंगा दशहरा और बटुक भैरव जयंती। गंगा दशहरा की दशमी बृहस्पतिवार को पड़ जाए तो वह पूरे दिन का सर्वार्थ सिद्ध, सर्व सिद्ध मुहूर्त हो जाता है, और जिस नक्षत्र में गंगा अवतरित हुईं उस हस्त से युक्त होकर अति दिव्य हो जाता है। श्रोता इन तिथियों के लिए स्वयं तैयार रहें — 25, 1 और 5।

20

शादी के फेरों में बँधी नकारात्मक शक्ति

दोनों पति-पत्नी के साथ बँधती है, जानकार से ही निराकरण

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:06–18:33

वक्ता कहते हैं कि शादी के फेरों में यदि कोई नकारात्मक शक्ति बँध जाती है तो विषय बड़ा अलग हो जाता है, क्योंकि वह पति-पत्नी दोनों के साथ बँधती है। इसका निराकरण सामान्य तरीके से नहीं हो पाएगा; पूरा विधि-विधान जानकार की सहायता लेकर ही किया जाएगा।

21

क्या सीताराम जप में आया माँ तारा का नाम उनका नाम-जप माना जाएगा?

सीताराम मंत्र के भीतर तारा का नाम उनका जप माना गया

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:34–18:46 · Also a question

एक श्रोता पूछते हैं कि सीताराम के जप में माँ तारा का नाम आता है, तो क्या वह भी उनका नाम-जप माना जाएगा। वक्ता कहते हैं कि बिल्कुल माना जाएगा, और इसे ज़बरदस्त प्रश्न बताते हैं।

एक श्रोता पूछते हैं: सीताराम के जप में माँ तारा का नाम आता है — तो क्या वह भी उनका नाम-जप माना जाएगा? वक्ता उत्तर देते हैं कि बिल्कुल माना जाएगा। वे कहते हैं कि यह ज़बरदस्त प्रश्न है।

22

पहले महाभैरव अनुष्ठान से पहले की शर्तें

पहली बार घर में कभी नहीं; पहले पाँच लाख पंचाक्षरी

· Reviewed Sep 14, 2026 · 18:47–19:32

जिस श्रोता ने अभी तक कोई साधना नहीं की, पर घर की परेशानी के कारण घर में अखंड ज्योति के साथ 41 दिन का महाभैरव मंत्र अनुष्ठान करना चाहते हैं, उनसे वक्ता कहते हैं कि महाभैरव के वीडियो में शुरू में घर में वह साधना करने को कहा ही नहीं गया — प्रथम बार में सीधे घर में उनकी साधना करनी ही नहीं है। बिना तपोबल के सीधे महाभैरव करेंगे तो वे बहुत असंतुलित कर देंगे। सबसे पहले पंचाक्षरी मंत्र का कम से कम पाँच लाख जप करें — पाँच लाख न हो सके तो सवा लाख अवश्य — उसके बाद ही मंदिर में विधि से महाभैरव का जप आरंभ करें; मंत्र हो जाए तब स्तोत्र का संपुट करके पाठ-प्रयोग शुरू करें।

Indexed, not endorsed as instruction

यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

Explore this topic