बटुक भैरव हृदय स्तोत्र: संपूर्ण पाठ विधि

बटुक भैरव हृदय स्तोत्र पाठ की चरणबद्ध विधि।

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The notes
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01

अभिचार के विरुद्ध बटुक भैरव हृदय स्तोत्र अनुष्ठान: किसके लिए है और क्यों काम करता है

बार-बार मिटती राहत के पीछे भागने के बजाय अपना आभामंडल सबल करें

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–03:46

वक्ता यह विधान उन गृहस्थों, स्त्री या पुरुष, को समर्पित करते हैं जो किसी ऐसी अभिचारिक समस्या से जगह-जगह भटक रहे हैं जिसका निदान नहीं हो रहा। जब आप पर तंत्र-मंत्र हुआ हो, वे कहते हैं, तो आपका आभामंडल बहुत कमज़ोर हो जाता है: शरीर भारी होता है, आप झूमने लगते हैं, क्रोध और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। लोग कहीं दिखा लेते हैं, कुछ समय राहत मिलती है, फिर वही अवस्था लौट आती है — क्योंकि जब भी आप अभिचार की मात्रा घटाते हैं, शत्रु नया प्रयोग डालकर उसे फिर बढ़ा देता है। स्थायी उत्तर है स्वयं को सबल करना — आभामंडल, शरीर, सूक्ष्म शरीर और प्राण ऊर्जा — ताकि शत्रु की गतिविधि आपको प्रभावित न कर सके; या तो किसी ऐसे की सहायता से जो उस स्तर तक पहुँचा सके, या स्वयं। यह विधान सबके लिए है, इसमें कोई विधि-निषेध नहीं, "आर या पार" वाला उपाय। बटुक भैरव, वे कहते हैं, सोलह वर्षीय बाल स्वरूप वाली महाशक्ति हैं, पर जब भक्तों को अभय देने और गलत करने वालों को दंड देने आते हैं तो कुछ नहीं देखते, बड़े से बड़े तांत्रिक मुँह की खाते हैं — इसलिए निश्चिंत होकर कीजिए; पर आप सही होने चाहिए और शरीर में इसे करने का सामर्थ्य होना चाहिए।

02

बटुक भैरव अनुष्ठान: स्थान, संकल्प की अवधि, वस्त्र, आसन और रोज़ की सामग्री

घर में तभी जब घर स्वयं अभिचार से मुक्त हो

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:47–06:09

वक्ता कहते हैं कि बटुक भैरव हृदय स्तोत्र का अनुष्ठान घर में तभी करें जब घर अभिचार से मुक्त हो और परेशानी केवल आपके शरीर पर हो; घर पर ही अभिचारिक क्रियाएँ हों तो शिव, महाकाली या किसी भी मंदिर में — हनुमान जी के मंदिर में भी — कीजिए, और पहला अनुष्ठान तो वैसे भी बाहर ही करना चाहिए। 11 या 21 दिन का संकल्प लें; अभिचार की मात्रा बहुत अधिक हो तो पहले 11 दिन का छोटा संकल्प, अगली बार 21 दिन का। वस्त्र पीला या लाल — स्त्रियाँ सूट-सलवार या साड़ी — और ऊन, लाल या पीले कंबल, या कुश का आसन, देवता की ओर मुख, दिशा का कोई निषेध नहीं। रोज़ दो-तीन गाय के गोबर के उपले, थोड़ा घी और कपूर मंदिर में छोटे हवन के लिए, गंगाजल, मीठा भोग — किशमिश, या गेहूँ के आटे में गुड़ और घी मसलकर बनाया मीठा रोट — और संकल्प के लिए सिक्का, फूल और हल्दी से पीला रंगा बिना टूटा बासमती चावल अक्षत के रूप में। हनुमान मंदिर हो तो भोग हनुमान जी को तुलसी पत्र डालकर, और वही भोग जहाँ बैठें वहाँ भैरव जी के नाम से; भैरव जी का भोग पूरे अनुष्ठान काल में स्वयं नहीं खाना — उसमें थोड़ा गंगाजल डालकर मंदिर के आसपास किसी भी कुत्ते को खिला देना है।

03

बटुक भैरव अनुष्ठान: संकल्प के शब्द और रोज़ का आरंभिक स्मरण व दीपक

गुरु या दत्तात्रेय, गणपति, कुल देवता, मंदिर के देवता, फिर भैरव का चौमुख दीपक

· Reviewed Sep 14, 2026 · 06:10–10:55

वक्ता कहते हैं कि बटुक भैरव हृदय स्तोत्र अनुष्ठान की हर बैठक अपने ऊपर गंगाजल छिड़ककर — किसी मंत्र की ज़रूरत नहीं — और हाथ में अक्षत, फूल और सिक्का लेकर अपने नाम से संकल्प करने से शुरू होती है: मेरे शरीर पर जिस भी शत्रु ने जो भी अभिचार कर्म किया है उसके समूल नाश हेतु, संपूर्ण रक्षण हेतु, बटुक भैरव बाबा की कृपा-प्राप्ति हेतु और भविष्य में शरीर व मानसिक अवस्था के हर प्रकार के रक्षण हेतु मैं बटुक भैरव हृदय स्तोत्र के पाठ का यथाशक्ति संकल्प लेता/लेती हूँ। सामग्री थाली में रख दें। फिर मानसिक गुरु स्मरण — गुरु न हों तो "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु" बोलते हुए दत्तात्रेय भगवान का गुरु रूप में, उनसे आशीर्वाद और आदेश माँगते हुए कि संकल्प पूरा कर शत्रु का समूल नाश कर सकूँ — फिर जो मंत्र आता हो उससे गणेश, फिर कुल के देवी-देवता (पता न हों तो "मेरे कुल के रक्षक, आप जो भी हों जहाँ भी हों" कहकर, मुक्त होकर भगवती की सेवा और जीवन-उद्देश्य पाने का आशीर्वाद माँगें)। फिर मंदिर के देवता को प्रणाम करके उनके नाम का तिल तेल, सरसों तेल या घी का दीपक जलाएँ, और अपने आसन के पास भैरव जी के नाम से सरसों तेल का मीडियम साइज़ चौमुख दीपक दीपक, काले धागे या रुई की आठ डबल बत्तियाँ, थाली में चावल या काले तिल पर, जो डेढ़-दो घंटे जले।

04

बटुक भैरव हृदय स्तोत्र: विनियोग, ऋष्यादि न्यास और लौंग-कपूर के साथ 27 से 108 पाठ

श्लोक 1 से 14 तक; संख्या बढ़ाएँ, घटाएँ नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:56–14:16

वक्ता कहते हैं कि डिस्क्रिप्शन से बटुक भैरव हृदय की पीडीएफ़ प्रिंट कराएँ और पहले उसमें दी आरंभिक विधि करें: गणेश, उमा-महेश्वर, गुरु और भैरव को नमः, पूर्व पीठिका, श्री देवी उवाच और श्री शिव उवाच। विनियोग के लिए हाथ में जल लेकर विनियोग मंत्र बोलें — अस्य श्री बटुक भैरव हृदय स्तोत्रस्य, बृहदारण्यक ऋषि, अनुष्टुप छंद, श्री बटुक भैरव देवता, अभीष्ट-सिद्ध्यर्थे पाठे विनियोगः — और जल जलते चौमुख दीपक दीपक के पास गिरा दें। केवल ऋष्यादि न्यास करें — सिर, मुख, हृदय, फिर पूरा शरीर स्पर्श — हृदय, अंग और कर न्यास छोड़ दें। फिर हाथ में कम से कम 18 लौंग और कपूर का एक बड़ा ढेला लिए हुए श्लोक 1 से 14 — "ॐ प्रणवे सः शिरः पातु" से "रक्ष रक्ष मां काल संकटात्" तक — कम से कम 27 बार, अधिक से अधिक 108 बार पढ़ें; 108 अति उत्तम, 27, 54, 81 या 108 जितना सामर्थ्य हो, सुपारी, फूल या उँगलियों पर गिनकर। रोज़ बढ़ाएँ, घटाएँ नहीं: पहले दिन 108 और अगले दिन 27 कभी नहीं। बाद में लौंग-कपूर खाली मिट्टी के दीपक में डालें, चौमुख दीपक पर, जो भैरव का स्वरूप है, जल समर्पित करें और वहीं उन्हें जला दें। यह रोज़ 11 या 21 दिन करना है, और अनुष्ठान कम से कम तीन बार।

05

बटुक भैरव अनुष्ठान: काले तिल के नौ लड्डुओं का रोज़ का हवन

हर लड्डू सिर पर एक बार उल्टा घुमाकर गोबर की अग्नि में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 14:17–16:00

पाठ और समर्पण के बाद, वक्ता कहते हैं, बटुक भैरव अनुष्ठान की हवन वाली विधि आती है। काले तिल के लड्डू बनाएँ: आधा किलो काला तिल, 250 ग्राम गुड़ और 125 ग्राम शुद्ध देसी घी, थोड़ा गंगाजल डालकर — वे 11 बनाने को कहते हैं, और रोज़ नौ की ज़रूरत पड़ती है, जो मंदिर ले जाने हैं। मंदिर में ऐसी जगह देखें जहाँ गाय के गोबर के उपले जला सकें, जलाएँ, और हर लड्डू को हाथ में लेकर सिर से लगाकर एक बार उल्टा घुमाएँ — ध्यान रहे, उल्टा — किसी मंत्र की ज़रूरत नहीं, केवल "ॐ बटुक भैरवाय नमः" — या ॐ भी न बोलें, बस "बटुक भैरवाय नमः" — या मन में "हे बटुक भैरव, आपको यह भोग समर्पित है, कृपा करके स्वीकार करें" बोलकर अग्नि में डाल दें; यह क्रिया नौ बार। फिर हाथ में जल लेकर अग्नि के चारों ओर क्लॉकवाइज़ तीन बार घेरा दें, जिसे बाँधना कहते हैं, भैरव जी को प्रणाम करके घर लौट आएँ। पूरी बैठक में 108 पाठ पर अधिकतम दो-तीन घंटे लगते हैं, 27 पर कम; पाठ जितने भी हों, लड्डू नौ ही रहेंगे।

06

बटुक भैरव अनुष्ठान: अंतिम दिन का लड्डू भोग और दान, रोज़ कुत्ते को खिलाना, और संकल्प सामग्री का विसर्जन

कोई प्रसाद घर नहीं आता; तीन अनुष्ठान पूरी मुक्ति देते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 16:01–17:56

वक्ता कहते हैं कि बटुक भैरव अनुष्ठान के अंतिम दिन, मंदिर चाहे काली जी का हो, शिव जी का या भैरव जी का, कम से कम आधा किलो से एक किलो, या सवा किलो तक लड्डू ले जाएँ, भोग लगाकर पुजारी जी को दे दें कि सबको बाँट दें; कोई भी प्रसाद घर नहीं लाना। उस दिन यथाशक्ति दान भी करें — अपने शरीर से स्पर्श कराकर अन्न या वस्त्र, या एक ही गरीब को भरपेट भोजन; जीव की सेवा ज़रूर करें। पूरे काल में रोज़ किसी आवारा कुत्ते को, पालतू नहीं — काले को, या जो भी मिले — नमकीन बिस्कुट खिलाएँ, यह कहते हुए "अभिचार से मुक्त कीजिए, मंत्र का प्रभाव मिले, बटुक भैरव की कृपा प्राप्त हो"। 11-11 दिन के तीन अनुष्ठान करें, या 21-21 के तीन, और आप पूरी तरह तंत्र से मुक्त हो जाएँगे; यह बिल्कुल सामान्य प्रयोग है, कोई विपरीत प्रभाव नहीं, डरने की ज़रूरत नहीं। संकल्प वाली थाली का दीपक मंदिर में कहीं अच्छे से रख दें ताकि पूरा जल जाए, और संकल्प का अक्षत किसी देवता के श्री विग्रह को समर्पित करें, शिव जी के पास रखें, या पूजे जाने वाले पीपल वृक्ष पर चढ़ाकर छोड़ दें — जहाँ पैर न लगे। बटुक भैरव पर पूरे समर्पण के साथ कीजिए, वे कहते हैं, उनकी कृपा से आपका रक्षण अवश्य होगा।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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