अमावस्या-पूर्णिमा के आसपास मन का टूटना — पीड़ित चंद्र, और अधिकाधिक मंत्र जप
अवसाद, चंद्र चक्र और उपाय पर एक वार्ता।
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बार-बार आता विचार, और क्या उसका कारण अब भी मायने रखता है
उन सभी के लिए जिनके मन में जीवन समाप्त कर लेने का विचार बार-बार आता है
वे सभी जिनके मन में यह विचार बार-बार आता है कि काश हम आत्महत्या कर लेते, क्योंकि जीवन व्यर्थ जा रहा है। वक्ता कहते हैं कि जिस भी कारण से आप इस ओर प्रेरित हो रहे हैं, उसी बात को देखिए — क्या वह बात वर्तमान समय में आपके लिए कोई मायने रखती है, और रखती भी है तो कितना?
यह वार्ता ऐसे श्रोता को सम्बोधित है जिसके मन में एक विचार बार-बार आता रहता है — कि काश हम अपना जीवन समाप्त कर लेते, क्योंकि यह जीवन व्यर्थ जा रहा है। वक्ता ऐसे व्यक्ति से कहते हैं कि उस बात को ही देखिए। वर्तमान समय में जिस भी कारण से, जिस भी बात से परेशान होकर आप स्वयं को इस ओर प्रेरित कर रहे हैं, या आपका मन बार-बार उसी ओर जाकर भटकाव की अवस्था को प्राप्त कर रहा है — क्या वह बात वर्तमान समय में आपके लिए कोई मायने रखती है? और रखती भी है तो कितना? वे यही प्रश्न आत्महत्या से आगे बढ़ाकर सामान्य अवसाद पर भी लागू करते हैं: यदि आप मानसिक रूप से बहुत अधिक ग्रसित हो रहे हैं, तो उसके सबसे बड़े कारण क्या-क्या हो सकते हैं, यह जान लीजिए।
पूर्णिमा, अमावस्या, ग्रहण — सबसे पहले पंचांग देखिए
पूर्णिमा या अमावस्या है, आसपास है या अभी बीती है, अथवा ग्रहण का समय है
पंचांग। क्या यह पूर्णिमा का समय है, या पूर्णिमा आसपास है, या अभी बीती है? क्या यह अमावस्या का समय है, या अभी आसपास अमावस्या बीती है? क्या ग्रहण लगने वाला है — सूर्य ग्रहण, और विशेष करके चंद्र ग्रहण?
वक्ता कहते हैं कि सर्वप्रथम, यदि आप इस अवस्था में हैं तो यह देखिए कि आप मास में कहाँ खड़े हैं। क्या यह पूर्णिमा का समय है? पूर्णिमा आसपास है, या अभी बीती है? क्या यह अमावस्या का समय है? क्या अभी आसपास अमावस्या बीती है? क्या यह ग्रहण का समय है — सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण लगने वाला है, विशेष करके चंद्र ग्रहण?
जन्म कुंडली दिखाइए, और आपको क्या सुनने को मिलेगा
जब यह अवस्था उन्हीं दिनों के आसपास बार-बार लौटे — अच्छा ज्योतिषी और जन्म कुंडली
अपनी जन्म कुंडली किसी अच्छे ज्योतिषी को दिखाइए। यदि उसी काल के आसपास यह अवस्था बार-बार होती है — आप काफी अधिक रोते हैं, स्वयं को एकदम अकेला महसूस करते हैं, और लगता है कि मैं अकेले ही रहूँ — तो सामान्यतः यही सुनने को मिलेगा कि कुंडली में चंद्र पीड़ित हैं।
यदि इसी समय, इस काल के आसपास आपके साथ बार-बार ऐसी अवस्था हो जाती है — आप काफी अधिक रोते हैं, स्वयं को एकदम अकेला महसूस करते हैं, आपको लगता है कि मैं अकेले रहूँ — तो अपनी जन्म कुंडली किसी अच्छे ज्योतिषी से दिखाइए। वक्ता कहते हैं कि सामान्यतः एक बात जरूर सुनने को मिलेगी: कि कुंडली में चंद्र पीड़ित हैं।
अवस्था का अप-डाउन, और निर्णय लेने की कमजोरी
पीड़ित चंद्र हर अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण पर अवस्था को अप-डाउन कर देते हैं, और निर्णय-शक्ति साथ छोड़ देती है
जब भी चंद्र पीड़ित होंगे — चाहे वह गोचर में हों या लग्न कुंडली में — तब-तब अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण काल में आपकी अवस्था थोड़ी अप-डाउन हो ही जाएगी और आप अवसाद ग्रसित हो जाएंगे। ऐसी अवस्था में व्यक्ति निर्णय लेने में बिल्कुल कमजोर हो जाता है: सामने दो डिसीजन रख दिए जाएँ तो एक भी नहीं ले पाएगा, क्योंकि मन उस समय काफी अधिक हिला हुआ रहता है।
वक्ता कहते हैं कि चंद्र जब भी पीड़ित हो जाएंगे — चाहे वह गोचर में हो या आपकी लग्न कुंडली में — तब जब-जब अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण काल होगा, उस समय आपकी अवस्था थोड़ी सी अप-डाउन हो ही जाएगी। आप अवसाद ग्रसित हो ही जाएंगे। ऐसी अवस्था में, वे कहते हैं, आप निर्णय लेने में बिल्कुल कमजोर हो जाएंगे। आपके सामने अगर दो डिसीजन रख दिए जाएँ तो आप एक निर्णय ले नहीं पाएंगे, क्योंकि मन उस समय काफी अधिक हिला हुआ रहेगा।
समुद्र का ज्वार भाटा, और वैसी ही हिलोरें भीतर
चंद्रमा का किसी व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता ही क्यों है?
क्योंकि चंद्र में जो वह बल है, जिससे वे पूर्णिमा और अमावस्या के आसपास समुद्र में ज्वार भाटा ला देते हैं, वैसी ही ज्वार भाटा की हिलोरें इस काल में आपके भीतर भी आती हैं — और यदि चंद्र पीड़ित हुए, तो फिर वे आपको अवसाद देने लगेंगे।
चंद्रमा मन के कारक भी हैं और मंत्र के कारक भी
चंद्रमा मन के भी कारक हैं और मंत्र के भी, इसीलिए उपाय जप बताया गया है
जप। जिस प्रकार से चंद्रमा मन के कारक हैं, उसी प्रकार से चंद्रमा मंत्र के भी कारक हैं। तो यदि हम मंत्र का अधिकाधिक जप करते हैं तो उससे चंद्र को बल मिलता है; और चंद्र को बल मिलेगा तो आपके मन को भी बल मिलेगा। मनन इति मंत्रः — इस तरीके से मंत्र और मन दोनों एक दूसरे के पूरक हो गए।
इस अवस्था से निकलने के लिए क्या करना चाहिए और उपाय क्या हो सकता है — यह पूछे जाने पर वक्ता कारकत्व से उत्तर देते हैं। जिस प्रकार से मन के कारक चंद्रमा हैं, उसी प्रकार से मंत्र के कारक भी चंद्रमा हैं। तो अगर हम मंत्र का अधिकाधिक मंत्र जप करते हैं, तो उससे चंद्र को बल मिलता है। और चंद्र को बल मिलेगा तो आपके मन को भी बल मिलेगा। मनन इति मंत्रः। तो इस तरीके से मंत्र और मन दोनों एक दूसरे के पूरक हो गए।
"मन लगा के करो" का वास्तविक अर्थ
मन लगाकर किया गया जप ही मंत्र को बल देता है, और उसी से मन भी सधता है
क्योंकि मन लगा के करेंगे तो ही उस मंत्र को बल मिलेगा — और जब मंत्र को बल मिलेगा तो आपका जो मन है, वह भी काफी अधिक डेवलप करेगा। इसी में इस कहावत का पूरा अर्थ है, चाहे वह पढ़ाई के लिए कही जाए, जप के लिए, या पूजा के लिए।
वक्ता कहते हैं कि कहते हैं ना — मन लगा के पढ़ाई करो, मन लगा के मंत्र जपो, मन लगा के पूजा करो। तो क्यों बोलते हैं कि मन लगा के करो? मन लगा कर के करने का अर्थ यही है कि मन लगा के करेंगे तो ही उस मंत्र को बल मिलेगा; और जब मंत्र को बल मिलेगा, तो आपका जो मन है वह भी काफी अधिक डेवलप करेगा।
एकाग्रचित्तता मन पर, मन चंद्र पर, चंद्र जप पर
एकाग्रचित्तता सधे हुए मन पर टिकी है, मन एकाग्र चंद्र पर, और चंद्र मंत्र जप पर
एकाग्रचित्त होने के लिए मन का सधना बहुत आवश्यक है; और मन तभी सधेगा जब आपके चंद्र कहीं न कहीं एकाग्र होंगे; और चंद्र तभी एकाग्रचित्त की अवस्था को प्राप्त करेंगे जब आप सही तरीके से मंत्र का अधिकाधिक जप करेंगे।
वक्ता कहते हैं कि इसीलिए कहा जाता है कि एकाग्रचित्त होने के लिए हमारे मन का सधना बहुत आवश्यक है। और मन तभी सधेगा जब आपके चंद्र जो हैं, कहीं न कहीं एकाग्र होंगे। और चंद्र तभी एकाग्रचित्त की अवस्था को प्राप्त करेंगे जब आप सही तरीके से मंत्र का अधिकाधिक जप करेंगे।
जो पहले से जपते आए हैं, उसी का अधिकाधिक पाठ-जप
कोई नया मंत्र नहीं चाहिए — जो आप पहले से अधिकाधिक जपते हैं, उसी का और अधिक जप कीजिए
नहीं। कोई भी मंत्र जो आप आज से पहले अधिकाधिक मात्रा में जपते आए हैं — चाहे आप कोई चालीसा पाठ करते हों, कोई स्तुति, स्तोत्र इत्यादि करते हों — उन्हीं का अधिकाधिक पाठ और जप इस अवस्था में करें, विशेष करके अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण काल में।
अधिकांश कुंडलियों में ग्रहण दोष और पितृ दोष होता ही है
मासिक पूर्णिमा और अमावस्या पर विशेष अनुष्ठान क्यों कहा गया है?
क्योंकि अधिकाधिक लोगों की कुंडली में ग्रहण दोष होता ही है और पितृ दोष होता ही है, और जब यह होगा तो व्यक्ति को परेशानी उसी समय होगी ही। इसीलिए और किसी समय आप कोई बड़ा अनुष्ठान करें या न करें, पर जो मासिक पूर्णिमा पड़े और जब आपकी अमावस्या पड़े, उस समय विशेष अनुष्ठान और पाठ करना चाहिए।
कहा जाता है कि और किसी समय में आप कोई बड़ा अनुष्ठानएक दीर्घ अनुष्ठान — जिसमें अपने कड़े नियम होते हैं। करें या न करें — लेकिन जो मासिक पूर्णिमा पड़े, जब आपकी अमावस्या पड़े, उस समय आपको विशेष अनुष्ठान, पाठ इत्यादि करना चाहिए। वक्ता इसके पीछे का कारण यह बताते हैं: अधिकाधिक लोगों की कुंडली में ग्रहण दोष होता ही है, पितृ दोष होता ही है। और जब यह चीज होगी तो व्यक्ति को परेशानी उस समय होगी ही। इसीलिए कहा गया है कि इस समय आप अधिकाधिक मंत्र जाप और पाठ इत्यादि किया करें, और इसकी आदत बनाएँ। और यदि आपके आसपास कोई तीर्थ क्षेत्र हो तो वहाँ जाएँ; कोई पुराना मंदिर हो तो उस दिन वहाँ जाकर अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराएँ। वहाँ शरणागत हो जाएँ।
हर अमावस्या और पूर्णिमा को मंदिर
एक नियम बना लीजिए: हर अमावस्या और पूर्णिमा को काली मंदिर, या अपने इष्ट के मंदिर
एक नियम बना लें कि हर अमावस्या को हम भगवती काली के मंदिर जाएंगे — या आपके जो भी इष्ट आराध्य हों, उनके मंदिर में अमावस्या और पूर्णिमा को जाएंगे। वक्ता कहते हैं कि इससे आपको काफी अधिक बल मिलेगा।
वक्ता कहते हैं कि अपने लिए एक नियम बना लें: कि हर अमावस्या को हम भगवती काली के मंदिर जाएंगे — या आपके जो भी इष्ट देवता और आराध्य हैं, उनके मंदिर में अमावस्या और पूर्णिमा को जाएंगे। इससे आपको काफी अधिक बल मिलेगा।
माता, मामा और मौसी
माता, मामा और मौसी का सत्कार, और उनसे आशीर्वाद
अपनी माता, अपने मामा और अपनी मौसी का विशेष करके सत्कार करें, उन्हें सम्मान दें, और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें। वक्ता कहते हैं कि इससे भी आपका मंत्र और आपका मन काफी बल को प्राप्त करेगा, और साथ में पूजन-पाठ तो है ही।
वक्ता कहते हैं कि इसके साथ ही साथ आप अपनी माता, अपने मामा और अपनी मौसी का विशेष करके सत्कार करें; उनको सम्मान करें; उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें। इससे भी आपका जो मंत्र है और आपका जो मन है, वह काफी बल को प्राप्त करेगा — और साथ में पूजन-पाठ जो है, वह तो है ही।
डिमोरलाइज करने वालों को छोड़ना, और स्वयं के लिए कठोर बनना
अच्छे लोगों का संग और डिमोरलाइज करने वालों को छोड़ना, क्योंकि अमावस्या-पूर्णिमा पर उनका असर सबसे भारी पड़ता है
अच्छे लोगों का संग करें और जो लोग आपको डिमोरलाइज करते हैं, उन्हें छोड़ें। ऐसे लोग बाकी समय तो करेंगे ही, पर अमावस्या-पूर्णिमा के समय जहाँ आपको डिमोरलाइज किया, वहाँ आप और टूटने लगेंगे — इसलिए ऐसे लोगों से दूरी बनाएँ। अपना डिसीजन स्वयं लें, हार्ड बनें, स्वयं के लिए कठोर बनें।
वक्ता कहते हैं कि साथ ही आप अच्छे लोगों का संग करें। जो लोग आपको डिमोरलाइज करते हैं, उनको छोड़ें। ऐसे लोग बाकी समय तो करेंगे ही, लेकिन अमावस्या-पूर्णिमा के समय में जहाँ आपको डिमोरलाइज किया, वहाँ आप और टूटने लगेंगे। इसीलिए ऐसे लोगों के साथ दूरी बनाएँ। अपना डिसीजन आप स्वयं लें। हार्ड बनें। स्वयं के लिए कठोर बनें। वे कहते हैं कि आप कठोरता के साथ चलेंगे तो अवश्य ही इन सभी चीजों से निकल जाएंगे।
अवस्था में बैठे रहने के बजाय कारण को जड़ से नष्ट करना
समापन: अवसाद की अवस्था में बैठे रहने के बजाय उसके कारण को जड़ से नष्ट करना
इस आशा के साथ कि इन विषयों को समझकर आप सही निर्णय लेकर आगे चलेंगे — कि आप अवसाद की अवस्था को प्राप्त होकर दुखी न होंगे, बल्कि उसका कारण ढूँढ़कर उस कारण को जड़ से ही नष्ट कर देंगे और अच्छे प्रकार से आगे बढ़ेंगे।
वक्ता इस आशा के साथ समापन करते हैं कि इन विषयों को समझ कर के आप सही निर्णय लेकर आगे चलेंगे। कि आप कभी भी अवसाद की अवस्था को प्राप्त होकर दुखी न होंगे, बल्कि उसके कारण को ढूँढ़ कर के उस कारण को उसकी जड़ से ही नष्ट कर देंगे, और आगे अच्छे प्रकार से बढ़ेंगे।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है। यह वीडियो आत्महत्या के विचारों और अवसाद पर ज्योतिष तथा साधना की दृष्टि से चर्चा करता है; यह चिकित्सकीय या मनोरोग सम्बन्धी परामर्श नहीं है, और संकट में पड़े किसी भी व्यक्ति को पेशेवर सहायता या हेल्पलाइन से सम्पर्क करना चाहिए।