अघोर चतुर्दशी और तारापीठ की महा अमावस्या
अघोर अमावस्या और महाविद्या तारा अमावस्या पर नोट्स।
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अघोर अमावस्या और महाविद्या तारा अमावस्या किसे मनानी चाहिए?
गुरु हो या न हो, हर तंत्र साधक
वक्ता कहते हैं कि यह दिन तंत्र संप्रदाय से जुड़े हर व्यक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है — चाहे वह नाथ संप्रदाय परंपरा में हो, कौल संप्रदाय परंपरा में, शाक्त परंपरा में या किसी अन्य परंपरा में। वे जोड़ते हैं कि यह उनके लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है जो बिना किसी गुरु परंपरा के स्वयं तंत्र संबंधी क्रियाएँ कर रहे हैं, और उनके लिए भी जो तंत्रोक्त पद्धति से किसी भी महाशक्ति की उपासना कर रहे हैं, भले ही उनका विधान सात्विक हो।
अघोर अमावस्या और महाविद्या तारा अमावस्या पर चर्चा शुरू करते हुए वक्ता पहले यह बताते हैं कि यह किसके लिए है। वे कहते हैं कि जो भी तंत्र संप्रदाय से संबंधित है, उसके लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है — चाहे वह नाथ संप्रदाय परंपरा में हो, कौल संप्रदाय परंपरा में, शाक्तउस परंपरा से संबंधित जो शक्ति को परम तत्त्व मानती है। परंपरा में या किसी अन्य परंपरा में। वे इसका दायरा और बढ़ाते हैं। जिसकी कोई गुरु परंपरा नहीं है पर जो स्वयं तंत्र संबंधी क्रियाओं में लगा है, वह भी इसमें आता है। और वह भी जो तंत्रोक्ततंत्र में कहा गया, जो उसी कर्म अथवा मंत्र के वेदोक्त रूप से भिन्न होता है। पद्धति से किसी भी महाशक्ति की उपासना कर रहा है, भले ही सात्विक विधान से। इन सभी के लिए, वे कहते हैं, यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है।
भाद्रपद अमावस्या पर साधक तारापीठ में क्यों जुटते हैं?
महाश्मशान साधना और तारा के दर्शन
वक्ता कहते हैं कि पश्चिम बंगाल, असम, नागालैंड और बांग्लादेश के लगे हुए क्षेत्रों के सभी साधक, क्षेत्रीय तांत्रिक और इन विद्याओं के अनुयायी भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को तारापीठ अवश्य आते हैं। वे महाश्मशान में साधना करने, वहाँ अपनी विद्याएँ जागृत करने, बैठकर अनुष्ठान और पुरश्चरण करने, और भगवती महाविद्या तारा के दर्शन करने आते हैं। वे बताते हैं कि यह दिन तारा जयंती नहीं है, फिर भी तंत्रोक्त साधना में इसका बहुत महत्व है।
वक्ता इस तिथि पर तारापीठ के खिंचाव का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि पूर्वोत्तर के पूरे क्षेत्र में — पश्चिम बंगाल से असम, नागालैंड और बांग्लादेश के इलाकों तक — जितने भी साधक हैं, जितने भी क्षेत्रीय तांत्रिक हैं और जो भी इस तरह की विद्याओं का अनुसरण करते हैं, वे सब भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को तारापीठ अवश्य आते हैं। वे गिनाते हैं कि लोग किसलिए आते हैं: महाश्मशान की साधना करने, महाश्मशान में अपनी विद्याएँ जागृत करने, वहाँ बैठकर विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान और पुरश्चरणनिर्धारित नियमों के अनुसार मंत्र की अनुष्ठानिक पुनरावृत्ति — तंत्र साधना में आवश्यक। करने, और भगवती महाविद्या तारा के दर्शन करने। वे साफ कहते हैं कि इस दिन तारा जयंती नहीं है। फिर भी, वे कहते हैं, इस दिन का बहुत महत्व है, और तंत्रोक्ततंत्र में कहा गया, जो उसी कर्म अथवा मंत्र के वेदोक्त रूप से भिन्न होता है। साधनाओं में इस दिन का बहुत महत्व है।
अघोर चतुर्दशी से तारा अमावस्या तक की साधना का समय कब शुरू और कब खत्म होता है
चतुर्दशी की रात से अमावस्या के विसर्जन तक
वक्ता समझाते हैं कि साधनाएँ उसी क्षण शुरू हो जाती हैं जब रात्रि में चतुर्दशी तिथि लगती है, और अमावस्या तिथि के विसर्जन तक चलती हैं; इस पूरे समय में लोग अपने जो भी मंत्र-तंत्र की साधना करनी हो, वह करते रहते हैं। वे 2021 का उदाहरण देते हैं: चतुर्दशी से संयुक्त अमावस्या सोमवार 6 सितंबर को थी, चतुर्दशी तिथि 5 सितंबर को थी, इसलिए सारी साधनाएँ 4 सितंबर की रात्रि से शुरू हुईं। वे सामान्य साधकों से, जिन्हें यह पता नहीं, इसे जानने और सही तरीके से करने को कहते हैं।
वक्ता उस वर्ष के हिसाब से समय तय करते हैं जिसमें वे बोल रहे हैं। वे कहते हैं कि 2021 में महाविद्या तारा अमावस्या, अघोर अमावस्या और अघोर चतुर्दशी — यानी चतुर्दशी से संयुक्त होकर पड़ने वाली अमावस्या — सोमवार 6 सितंबर को पड़ी। चतुर्दशी तिथि 5 सितंबर को रही। इसलिए, वे कहते हैं, सारी साधनाएँ 4 सितंबर की रात्रि से शुरू हो गईं। इससे वे सामान्य नियम निकालते हैं: रात्रि में जब भी चतुर्दशी तिथि लग जाए, उसी समय से लोग ये साधनाएँ शुरू कर देते हैं, और अमावस्या तिथि के विसर्जन तक अपने मंत्र, तंत्र और जो भी साधना करनी हो, वह करते रहते हैं। फिर वे उस सामान्य साधक की ओर मुड़ते हैं जिसे इस विषय की जानकारी नहीं है, और उससे कहते हैं कि यह जानकारी ले, इसे सही तरीके से समझे और करे।
अघोर चतुर्दशी और तारा अमावस्या पर क्या साधना करें: परंपरा और इष्ट के अनुसार
अपना मंत्र, अपनी विधि, तीनों तिथियाँ
इस दिन क्या करना चाहिए, इस पर वक्ता परंपरा के अनुसार उत्तर देते हैं। शाबर क्षेत्र का साधक सबर मंत्र या अपनी तंत्रोक्त विधियों जैसे सहस्रार्चन से पूजन करे, और चतुर्दशी की रात्रि तथा अमावस्या की रात्रि — पूरी तीनों तिथियाँ — उसमें ले ले; 2021 में इसका अर्थ था रविवार, सोमवार से मंगलवार की रात्रि या मंगलवार की सुबह तक जप। विधि-विधान अपने इष्ट देवता के अनुसार ही रखना है: जैसे महाविद्या भगवती महाकालिका का साधक उनके जिस भी मंत्र की बार-बार साधना, अनुष्ठान या पुरश्चरण कर चुका है, उसी मंत्र का जप और हवन इन तिथियों में अवश्य करे।
वक्ता स्वयं प्रश्न रखते हैं — इस दिन क्या करना चाहिए? — और दो भागों में उत्तर देते हैं। पहला, शाबर पक्ष के लिए। वे कहते हैं कि यदि साधक शाबर क्षेत्र से संबंधित है, तो वह सबर मंत्र से या अपनी तंत्रोक्ततंत्र में कहा गया, जो उसी कर्म अथवा मंत्र के वेदोक्त रूप से भिन्न होता है। विधियों से, जैसे सहस्रार्चनसहस्र गुणित अर्पण अथवा जप-संख्या वाली पूजा-विधि, अघोर चतुर्दशी व तारा अमावस्या जैसे विशेष प्रभावशाली अवसरों पर शाबर परंपरा के साधकों द्वारा प्रयुक्त।, पूजन करे। निर्देश यह है कि पूरी की पूरी तीनों तिथियाँ शामिल कर ली जाएँ: चतुर्दशी की रात्रि और अमावस्या की रात्रि, पूरी तरह। 2021 के उदाहरण में, वे कहते हैं, इसका अर्थ था कि साधक रविवार, सोमवार से लेकर मंगलवार की रात्रि या मंगलवार की सुबह तक अपने मंत्रों का जप कर सकता था। दूसरा, सबके लिए: विधि-विधान अपने इष्ट देवता के अनुसार ही रखें। वे उदाहरण देते हैं। मान लीजिए सुनने वालों में से कोई साधक महाविद्या भगवती महाकालीका की साधना कर रहा है। तो उनके जिस भी मंत्र की उस साधक ने बार-बार साधना, अनुष्ठान और पुरश्चरणनिर्धारित नियमों के अनुसार मंत्र की अनुष्ठानिक पुनरावृत्ति — तंत्र साधना में आवश्यक। की है, उन्हीं मंत्रों का अनुष्ठान — उनका जप, हवन इत्यादि — अघोर चतुर्दशी और महाविद्या तारा अमावस्या की इन तिथियों में जरूर करे। यह, वे कहते हैं, करना चाहिए।
सामान्य दिनों की तुलना में अघोर चतुर्दशी और तारा अमावस्या की साधना का फल
तपोबल बढ़ता है, ज्ञात-अज्ञात पाप कटते हैं
वक्ता कहते हैं कि इन दिनों में की गई साधना सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक लाभ देती है। न सिर्फ उस मंत्र का तपोबल बढ़ता है और ऊर्जा बढ़ती है, बल्कि साधक के बहुत सारे ज्ञात-अज्ञात पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसीलिए, वे कहते हैं, प्रत्येक तंत्र प्रेमी और साधक को अघोर चतुर्दशी, अघोर अमावस्या और महाविद्या तारा अमावस्या का लाभ अवश्य उठाना चाहिए।
कौन से मंत्र करने हैं, यह बताने के बाद वक्ता बताते हैं कि ये दिन क्यों मूल्यवान हैं। वे कहते हैं कि सामान्य दिनों में जो लाभ मिलता है, इन दिनों में साधना करने से उससे कई गुना अधिक लाभ मिलता है। वे दो लाभ गिनाते हैं। पहला, उस मंत्र का तपोबलनिरंतर साधना से अर्जित तपस्या का बल बढ़ेगा, और ऊर्जा बढ़ेगी। दूसरा, और उससे आगे, साधक के बहुत सारे ज्ञात और अज्ञात पाप नष्ट हो जाएँगे। इसलिए, वे कहते हैं, इस दिन का लाभ उठाना चाहिए। प्रत्येक तंत्र प्रेमी और साधक को अघोर चतुर्दशी, अघोर अमावस्या और महाविद्या तारा अमावस्या का लाभ अवश्य उठाना चाहिए — इस वर्ष भी और हर वर्ष।
अघोर अमावस्या या तारा अमावस्या पर किन शक्तिपीठों में जाएँ?
अपने पास के तंत्रोक्त और वामाचार पीठ
वक्ता कहते हैं कि आगे के वर्षों में जब भी अघोर अमावस्या या महाविद्या तारा अमावस्या की तिथि पड़े और परिस्थितियाँ सामान्य हों, साधक अपने आसपास के शक्ति पीठ में जाने का प्रयास करें — खासकर वहाँ जहाँ भगवती की शक्तियाँ तंत्रोक्त हों या जहाँ उनकी सेवा-पूजा और साधना वामाचार पद्धति से होती हो। वे कामरूप कामाख्या, बीरभूम (पश्चिम बंगाल) की भगवती महाविद्या तारापीठ, झारखंड का रजरप्पा, बिहार का महाविद्या तारा का एक पीठ, और तंत्रोक्त पद्धति से पूजित अन्य लोकप्रचलित पीठों के नाम लेते हैं। इस दिन वहाँ जाकर हाजिरी लगाइए, वे कहते हैं, आपके बहुत सारे रुके हुए कार्य पूर्ण हो जाएँगे।
जिस वर्ष में वे बोल रहे हैं उससे आगे देखते हुए वक्ता कहते हैं कि आगे के वर्षों में जब भी अघोर अमावस्या, महाविद्या तारा अमावस्या इत्यादि की तिथि पड़े, तो सभी को प्रयास करना चाहिए — यदि सारी परिस्थितियाँ सामान्य हों — अपने आसपास के शक्ति पीठ में जाने का। वे बताते हैं कि किस तरह के पीठ। उस दिन भगवती से संबंधित जितनी भी शक्तियाँ हैं, खासकर यदि वे तंत्रोक्ततंत्र में कहा गया, जो उसी कर्म अथवा मंत्र के वेदोक्त रूप से भिन्न होता है। शक्तियाँ हैं, या जहाँ वामाचार पद्धति से भगवती की साधना-उपासना और सेवा-पूजा होती है — यदि ऐसा शक्तिपीठ आपके आसपास है, तो इस दिन आपको वहाँ जरूर जाना चाहिए। उनके उदाहरण: कामरूप कामाख्या; पश्चिम बंगाल के बीरभूम में भगवती महाविद्या तारापीठ; रजरप्पा, जो झारखंड में पड़ता है; और बिहार में भगवती महाविद्या तारा का एक पीठ। इनके साथ वे तंत्रोक्त पद्धति से पूजित अन्य सभी लोकप्रचलित पीठों और शक्तिपीठों को भी जोड़ते हैं। इस दिन ऐसी सभी जगहों में जाकर हाजिरी लगाकर देखिए, वे कहते हैं, आपके बहुत सारे रुके हुए कार्य पूर्ण हो जाएँगे।
विशेष स्थिति: मंत्र साधना जो फल नहीं दे रही
जब साधना असर न दे, इस दिन का लाभ लें
वक्ता उन लोगों को संबोधित करते हैं जो मंत्र-तंत्र की साधना करते हैं, मंत्रों को जागृत करने का कार्य करते हैं, साधना में लगे हैं, पर उनकी साधना कोई विशेष प्रभाव नहीं दे रही। उनसे वे कहते हैं: अघोर अमावस्या और महाविद्या तारा अमावस्या के इस दिन का लाभ उठाकर देखिए — आपको बहुत ही विशेष लाभ होगा।
समापन के रूप में वक्ता एक तरह के साधक को अलग से संबोधित करते हैं। वे कहते हैं कि यदि आप मंत्र-तंत्र की साधना करते हैं, मंत्रों को जागृत करने का कार्य करते हैं, साधना में लगे हैं — और वह कोई विशेष प्रभाव नहीं दे रही — तो अघोर अमावस्या और महाविद्या तारा अमावस्या के इस दिन का लाभ उठाकर देखिए। आपको बहुत ही विशेष लाभ होगा, वे कहते हैं। यह लाभ किस रूप में मिलेगा, यह वे नहीं बताते।
यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।