सिद्ध मंत्र प्रभाव देना बंद कर दे तो — मंत्र दोष कैसे लगता है और मकर संक्रांति का काले तिल के लड्डुओं का उपाय

सिद्ध मंत्र अपना प्रभाव क्यों खो देता है (मंत्र दोष लगने के प्रकार), और वक्ता का मकर संक्रांति का उपाय — काले तिल के 108 लड्डुओं पर जप, पोटली का दान, और फिर एक छोटा अनुष्ठान जिससे मंत्र पुनः जागृत हो।

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01

सिद्ध किया हुआ मंत्र प्रभाव देना क्यों बंद कर देता है?

दोष मंत्र में आया है या साधक में

· Reviewed Sep 14, 2026 · 00:05–01:29 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि यदि आप लंबे समय से जिस मंत्र का जप कर रहे हैं — तंत्रोक्त, पौराणिक या सबर मंत्र — वह पहले संकल्प लेकर किए गए कार्य को सिद्ध कर देता था, लेकिन कुछ समय से उसके प्रयोग का प्रभाव नहीं मिल रहा, तो इसका अर्थ है कि मंत्र किसी न किसी प्रकार के दोष से युक्त हो गया है। या तो दोष मंत्र में आया है या आप में; इन दोनों में से एक कारण होता है। वे कहते हैं कि इसकी शुद्धि एक सामान्य-सरल विधान से होती है जिसे हर गृहस्थ साधक कर सकता है।

02

मंत्र कैसे जागृत होता है और साधक के आभामंडल पर उसका क्या असर होता है

निश्चित अवधि का संकल्प; देवता का सिद्ध होना जरूरी नहीं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 01:30–03:01

वक्ता कहते हैं कि हर मंत्र को सिद्ध करने की अपनी एक विधि होती है: आप निश्चित समय से निश्चित समय तक संकल्प लेकर निश्चित मात्रा में जप, हवन, तर्पण, दान-पुण्य इत्यादि करते हैं, तब वह मंत्र आपके लिए जागृत हो जाता है। आपने मंत्र कहाँ से लिया या दीक्षित हैं या नहीं, यह बात यहाँ नहीं आती। जागृत होने पर वह आपके आभामंडल को विकसित कर देता है, आरंभ काल में आपको सकारात्मक चीजों के प्रति बहुत संवेदनशील बनाता है, जागृति और लोगों पर आकर्षण बढ़ा देता है — भले मंत्र के देवता आपसे सिद्ध न हुए हों, उनकी कृपा से ही मंत्र कार्य करता है।

03

सिद्ध मंत्र की गोपनीयता का टूटना: माला का छू जाना, जप में दृष्टि पड़ना, जप-संख्या की डींग

जैसे वरदान या श्राप से ऋषि का तपोबल शून्य होता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 03:02–04:51

वक्ता कहते हैं कि सिद्ध मंत्र का रक्षण कैसे किया जाए यह न जानने से साधक यह गलतियाँ करता है: जिस माला से मंत्र जपा था उसे घर का कोई और सदस्य छू लेता है; गोमुखी से माला बाहर निकालकर जप करते हुए किसी की दृष्टि पड़ जाती है; मंत्र सभा में बोल दिया जाता है; या साधक के रूप में मान पाने के दिखावे में लोगों को बताया जाता है कि "मैंने सवा लाख जप कर लिया, पाँच लाख कर लिया", और पूछने पर मंत्र भी बता दिया जाता है। जो गोपनीयता रखनी थी वह नहीं रखी, इसलिए मंत्र का प्रभाव सीमित और क्षीण होने लगता है। वे इसकी तुलना पुराणों के ऋषियों से करते हैं जिनका तपोबल वरदान या श्राप देने पर शून्य हो जाता था और उन्हें पुनः तपस्या करनी पड़ती थी।

04

तांत्रिक प्रवृत्ति के परिचित को भेद बताने से साधक दूषित हो सकता है और मंत्र चुप हो जाता है

सामने वाले के मन में क्या है, आप नहीं जान सकते

· Reviewed Sep 14, 2026 · 04:52–05:28

वक्ता चेतावनी देते हैं कि साधना के क्षेत्र में जिससे अच्छी जान-पहचान हुई हो, मार्गदर्शन की आशा में उससे खुलकर न कहें: उससे प्रभावित होकर आप कह देते हैं "आप साधक हैं, मैंने यह जप किया है, मुझे इस मार्ग पर आगे बढ़ना है"। सामने वाले के मन में क्या है यह आप नहीं जान सकते। यदि वह तांत्रिक प्रवृत्ति का हुआ तो उसे इन चीजों में महारत होती है; मंत्र बाँधे या न बाँधे, वह आपके शरीर को दूषित कर देगा, और फिर वह मंत्र आपके लिए कार्य नहीं करेगा। वे कहते हैं कि अगला व्यक्ति कितना समर्पित या योग्य है, यह अलग बात है।

05

क्या सिद्ध मंत्र से गर्भवती या रजस्वला स्त्री को झाड़ा लगाया जा सकता है?

वहाँ पार्वती, कामाक्षी और दुर्गा के मंत्र प्रयोग होते हैं

· Reviewed Sep 14, 2026 · 05:29–07:31 · Also a question

वक्ता कहते हैं कि जो साधक अपने मंत्र से घर के छोटे-मोटे उपचार करता रहा है — अभिमंत्रित जल, भस्म, फूँक — वह किसी दिन हनुमान या किसी ऐसे नियम-बहुल देवता के साबर या तंत्रोक्त मंत्र से ऐसी स्त्री को झाड़ा लगा देता है जिस पर उसका प्रयोग नहीं करना चाहिए था: तीन माह से अधिक की गर्भवती, या रजस्वला स्त्री। ऐसे बहुत से मंत्र वहाँ निषिद्ध हैं, जब तक मंत्र गुरु परंपरा से गुरु के निर्देश सहित न मिला हो। रजस्वला स्त्री को कष्ट या ऊपरी बाधा हो तो पार्वती, कामाक्षी या दुर्गा के मंत्र प्रयोग होते हैं। एक ही मंत्र से सब पर हर चीज नहीं की जा सकती; गलत प्रयोग से मंत्र दूषित होकर प्रभावहीन हो जाता है।

06

ऐसे सहकर्मी को अभिमंत्रित प्रसाद खिलाना जो स्वयं सिद्धि-प्राप्त साधक हो

उसका तपोबल मंत्र को क्षीण कर देता है

· Reviewed Sep 14, 2026 · 07:32–08:04

वक्ता मंत्र के प्रभाव खोने का एक और तरीका बताते हैं: आप किसी वस्तु का अभिमंत्रण करके ऐसे व्यक्ति को खिला देते हैं जिसे नहीं खिलाना चाहिए था। मान लीजिए आपके व्यापार-स्थल या कार्यालय का वह व्यक्ति स्वयं तंत्र प्रवृत्ति का है, स्वयं साधक है और उसने कोई सिद्धि प्राप्त कर रखी है, और आपने अनजाने में संकल्प लिया "यह व्यक्ति मेरे पक्ष में हो जाए" और अपने मंत्र से अभिमंत्रित प्रसाद उसे खिला दिया। वे कहते हैं कि ऐसी स्थिति में आपका मंत्र उस व्यक्ति के तपोबल के प्रभाव से क्षीण हो जाएगा।

07

दोषग्रस्त मंत्र के लिए मकर संक्रांति का उपाय: 108 काले तिल के लड्डुओं पर जप

सूर्य के मकर-प्रवेश की सुबह; एक लड्डू एक जप; संकल्प; पोटली

· Reviewed Sep 14, 2026 · 08:05–10:19

वक्ता कहते हैं कि जब आपके मंत्रों या साधना में दोष लग जाए तो एक सरल, सटीक विधान है जो विशेष रूप से मकर संक्रांति के लिए ही है और किसी भी वर्ष की संक्रांति को किया जा सकता है — जिस दिन सूर्य मकर में प्रवेश करे (14 या 15 जनवरी; देख लें) उस दिन सुबह। केवल काले तिल के 108 छोटे, शुद्ध लड्डू लाएँ या बनाएँ; बाहर से लाए हों तो गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। स्नान और अपने नित्य गुरु, गणपति और इष्ट पूजन के बाद मंत्र को दोषमुक्त करने का संकल्प लें, फिर दोषग्रस्त मंत्र का 108 जप करें — गंगाजल छिड़के काले कपड़े पर एक जप, एक लड्डू रखते जाएँ (मंत्र बड़ा हो तो 27 जप, हर बार हाथ में चार लड्डू)। सभी 108 की पोटली बना लें।

08

लड्डू की पोटली दान करने के तीन तरीके: सात्विक ब्राह्मण को, गोबर की अग्नि में सूर्य को, या हवन की पूर्णाहुति में

हर विधि के साथ दक्षिणा जरूर

· Reviewed Sep 14, 2026 · 10:20–12:04

वक्ता 108 जपे हुए लड्डुओं की पोटली के लिए तीन विधियाँ बताते हैं। पहली: उसी दिन पूरी पोटली पंडित-जैसे संकल्प और कुछ दक्षिणा के साथ किसी शुद्ध सात्विक ब्राह्मण को दें — जो मांस न खाता हो, यह आपको पता होना चाहिए। दूसरी: नदी तट पर कच्चे गोबर से भूमि लीपें, अबीर-गुलाल की थोड़ी रंगोली बनाएँ, गोबर के कंडे कपूर से जलाएँ, उस अग्नि में पूरी पोटली सूर्य नारायण को मंत्र-दोष मुक्ति की प्रार्थना बोलते हुए समर्पित करें और वहाँ यथाशक्ति गरीबों को दान करें। तीसरी: किसी शक्ति पीठ, तीर्थ या नदी-किनारे के मंदिर में जहाँ संक्रांति पर बड़े कुंड का हवन हो रहा हो, पूर्णाहुति के समय पोटली उस कुंड में समर्पित करें और आयोजकों व ब्राह्मणों को यज्ञ भगवान के निमित्त दक्षिणा दें।

09

संक्रांति के दिन पोटली दान न हो सके तो विकल्प: सात दिन के भीतर ब्राह्मण के घर

हर दिन थोड़ी दक्षिणा जोड़ते जाएँ

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:05–12:41

वक्ता कहते हैं कि यदि किसी कारण तीनों में से कोई काम न हो पाए — आसपास मंदिर बंद हों, कोरोना या किसी और कारण से — तो पूरे लड्डू दक्षिणा सहित एक सप्ताह के भीतर, सात दिन के भीतर, किसी ब्राह्मण के घर पहुँचा दें। यह एक तरह का भार होता है, इसलिए हर दिन कुछ दक्षिणा उसमें रखते जाएँ, ₹10 प्रतिदिन, या सात दिन में ₹100 अलग से निकालकर रखें, और वह दक्षिणा किसी अच्छे ब्राह्मण को दें। वे कहते हैं कि इस प्रकार करने से मंत्र दोषमुक्त हो जाता है।

10

मंत्र दोष शुद्धि के बाद, मंत्र को पुनः प्रयोग में लेने से पहले छोटा अनुष्ठान

पाँच, सात, ग्यारह या इक्कीस दिन; विधान केवल संक्रांति के दिन

· Reviewed Sep 14, 2026 · 12:42–13:02

वक्ता कहते हैं कि मंत्र दोषमुक्त हो जाने के बाद उसका पुनः एक सामान्य अनुष्ठान कर लेना चाहिए — पाँच-सात दिन, ग्यारह दिन या इक्कीस दिन का — और तभी मंत्र को पूरी तरह पुनः प्रयोग में लेना चाहिए। वे जोड़ते हैं कि यह विधान पूर्ण रूप से मकर संक्रांति के दिन ही करना चाहिए; अन्य दिन के लिए वे अलग प्रयोग बताएँगे।

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यह जानकारी एक सार्वजनिक बाहरी स्रोत (यूट्यूब वीडियो, लेखक गृहस्थ तंत्र) से सीखी गई हमारी टिप्पणियाँ हैं। OccultGuide इस ज्ञान या इन प्रथाओं की न तो पुष्टि करता है और न ही इनका मूल स्रोत है।

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