वाचां निमित्तं स निमित्तमाद्यं पदं त्रिलोक्यामददत्स्तुतीनाम् ॥
सर्वैश्च वंद्यं न च तस्य वंद्यः स्थाणोः परं रूपमसौ स पायात् ॥ १९ ॥
vācāṃ nimittaṃ sa nimittamādyaṃ padaṃ trilokyāmadadatstutīnām
sarvaiśca vaṃdyaṃ na ca tasya vaṃdyaḥ sthāṇoḥ paraṃ rūpamasau sa pāyāt
वाचाम् निमित्तम् सः निमित्तम् आद्यम्पदम् त्रि-लोक्याम् अददत् स्तुतीनाम्सर्वैः च वंद्यम् न च तस्य वंद्यःस्थाणोः परम् रूपम् असौ सः पायात्
हिन्दी अर्थ
वे वाणी के निमित्त, आद्य निमित्त हैं, जो त्रिलोकी में स्तुतियों को पद देते हैं; सबसे वन्दित, पर उनके लिए कोई वन्दनीय नहीं — स्थाणु के परम रूप वे रक्षा करें।
English sense
He is the cause of speech, the first cause, who gives praises their place in the three worlds; adored by all, yet none is to be adored by him — may he, the supreme form of Sthāṇu, protect.
पदार्थ · word by word
वाचाम् निमित्तम् सः निमित्तम् आद्यम्
he is the cause of speech, the first causeवे वाणी के निमित्त, आद्य निमित्त
पदम् त्रि-लोक्याम् अददत् स्तुतीनाम्
giving praises their place in the three worldsत्रिलोकी में स्तुतियों को पद देते हुए
सर्वैः च वंद्यम् न च तस्य वंद्यः
adored by all, yet none is to be adored by himसबसे वन्दित, पर उनके लिए कोई वन्दनीय नहीं
स्थाणोः परम् रूपम् असौ सः पायात्
may he, the supreme form of Sthāṇu, protectस्थाणु के परम रूप वे रक्षा करें